श्रीमद्भगवद्गीता परिचय (Shrimad Bhagavad Gita Parichay)

श्रीमद्भगवद्गीता परिचय (Shrimad Bhagavad Gita Parichay)

परिचय
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Description
कृष्ण को व्यक्ति रूप में नहीं जानना है, स्वयं कृष्ण बता गये हैं कि कृष्ण को कैसे जानना है। कृष्ण कह रहे हैं, 'मैं वो हूँ जिसको कोई कर्म लिप्त या बद्ध नहीं करता।' कृष्ण के मुख से यह कृष्ण का परिचय है – ‘मैं कौन हूँ? सब कर्म मुझे लिप्त नहीं करते, कर्मफल की मेरी कोई इच्छा नहीं है। जो व्यक्ति मुझे ऐसा जानता है, वह भी कर्मों में बद्ध नहीं होता।' जिसने जान लिया कि कृष्ण वो हैं जो कभी कर्मों में लिप्त नहीं होते, वो स्वयं भी फिर कभी कर्मों में लिप्त नहीं होता। क्योंकि उपनिषद् बता गये हैं कि जो ब्रह्म को जान जाता है वो ब्रह्म ही हो जाता है। अब इसके बाद सन्देह की और भूल-भुलैया की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
Index
CH1
अपने ही विरुद्ध रण है गीता
CH2
व्यर्थ है शोक करना
CH3
निष्काम कर्म ही यज्ञ है
CH4
जो उच्चतम है, वही हो जाना है
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