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इश्क़ है - अपने भीतर की ताकत से मिलना

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सूफ़ी संत रूमी के काव्य पर आधारित
Watch Complete Series
1 घंटा 39 मिनट
हिन्दी
विशिष्ट वीडियोज़
पठन सामग्री
आजीवन वैधता
Contribution: ₹199 ₹500
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परिचय
लाभ
संरचना

ज़िंदगी का कोई अहम फ़ैसला हो या आगे न बढ़ पाने की स्थिति - क्या आप ऐसे वक़्त खुद को कमज़ोर मानकर चुनौती के सामने हार मान लेते हैं?

“मैं क्या करूँ?”

“मैं मजबूर हूँ!”

क्या ऐसी आवाज़ें आपको घेरने लगती हैं?

जीवन को गहराई से जानने वाले हमें मजबूर देखकर मुस्कुराते हैं क्योंकि उन्हें दिख रहा है कि हम मजबूर है नहीं, बस अपना दम भूल गए हैं।

ऐ जान, कब आया तुझ में ये दम?
ऐ दिल, कब से इस धड़कन को जाना?

संत रूमी की इन पंक्तियों पर आधारित प्रेम-काव्य की आख़िरी वीडियो सीरीज़ में आचार्य प्रशांत से हम सीखेंगे कि जब इश्क़ जीवन में आता है, तब कैसे वह भीतरी दम प्रकट होता है, जिसे हम बार-बार भुला देते हैं।

FAQs

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क्या ये लाइव वीडियो हैं या इसमें पहले से रिकॉर्डेड वीडियो हैं?
वीडियो श्रृंखला के लिए सहयोग राशि क्यों रखी गयी है? यह निःशुल्क क्यों नहीं है?
सहयोग राशि से अधिक दान देने से मुझे क्या लाभ होगा?
वीडियो श्रृंखला की रजिस्ट्रेशन की प्रकिया के बाद मैं उसे कब तक देख सकता हूँ?
क्या वीडियो श्रृंखला के वीडियो को बार-बार देखने की सुविधा उपलब्ध है?
मुझे वीडियो श्रृंखला से बहुत लाभ हुआ, अब मैं संस्था की कैसे सहायता कर सकता हूँ?
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