
क्रांति। ऐसा शब्द जिसे सुनते ही हमारे सामने एक ही नाम आता है—भगत सिंह। आज भी अनेक क्रांतियाँ हैं जो भगत सिंह जैसे योद्धाओं की माँग कर रही हैं। आज भी ऐसे संघर्ष हैं जिनके लिए निर्भीक और स्पष्ट दृष्टि वाले व्यक्तित्व की आवश्यकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगत सिंह जैसे व्यक्तित्व बनते कैसे हैं? भगत सिंह ने अपने अल्प जीवनकाल में अनेक दिशाओं का साहित्य पढ़ा था। न केवल विश्व भर का साहित्य—महान क्रांतिकारियों और चिंतकों के विचार—बल्कि वह साहित्य भी जो भीतरी जगत के डर और कमजोरियों से परिचित कराता है और उनसे लड़ने की हिम्मत देता है—गीता और उपनिषद्। क्या आप जानते हैं कि गीता और उपनिषद् भगत सिंह के जीवन का अभिन्न अंग थे? भगत सिंह इसी व्यापक अध्ययन और गहरे चिंतन का परिणाम थे। चाहे असेंबली में बम फेंकने का निर्णय हो या अपने प्राणों की आहुति देने का—यह सब उसी गहरी स्पष्टता और बोध का परिणाम था जिसके सामने व्यक्तिगत हित भी छोटे लगते हैं।
लेकिन आज प्रश्न यह है— क्या यह स्पष्टता आज के युवा के भीतर है? क्या ऐसे साहसी और स्पष्ट चुनाव आज का युवा कर पाएगा?
इस वीडियो शृंखला के माध्यम से आप उस प्रकाश से परिचित होंगे जिसके कारण भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी जन्म लेते हैं।
Can’t find the answer you’re looking for? Reach out to our support team.