
जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की चेतावनी नहीं है, यह आज का तथ्य है। हर हीट वेव, हर बाढ़, हिमालय में होने वाला हर भूस्खलन—आज हमसे चीख-चीखकर कुछ कहना चाहता है। लेकिन क्या हम अपने अस्तित्व पर आए इस संकट को सुन पा रहे हैं? हमारे आस-पास का माहौल हो, नेताओं की रैलियाँ हों, टीवी हो या सोशल मीडिया— कहीं इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा देखने को नहीं मिलती?
पिछले 15 वर्षों से आचार्य प्रशांत हमें इस मुद्दे पर जागरूक करते आए हैं। वास्तव में, हम इस संकट में न सिर्फ फँस गए हैं, बल्कि इसका कारण भी हम ही हैं। ऐसी स्थिति में अब चुप रहना या तथ्यों से अनजान बने रहना—दोनों ही विकल्प शेष नहीं हैं।
यह वीडियो श्रृंखला उन सवालों के उत्तर देती है जो पूछे नहीं जा रहे:
यह वीडियो सीरीज़ आपको जागरूक ही नहीं करती — यह आपको ठोस तथ्यों के साथ वह दिशा देती है जो इस संकट से निपटने के लिए अब सबसे ज़रूरी है।
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