Combo books @99/book! 60+ combos available. FREE DELIVERY! 😎🔥
AP Books
आह! जवानी
आग है नसों में या है पानी!
book
ई-पुस्तक ले चुके हैं?
लॉगिन करें
ई-पुस्तक
तत्काल उपलब्ध
सुझायी सहयोग राशि
₹51
₹150
पेपरबैक
स्टॉक उपलब्ध
47% छूट
₹159
₹300
अब आप सर्वोत्तम पढ़ने के अनुभव के लिए हमारे मोबाइल ऐप पर ईबुक पढ़ सकते हैं ऐप देखें
मात्रा:
1
स्टॉक में
मुफ़्त डिलीवरी
पुस्तक का विवरण
भाषा
hindi
प्रिंट की लम्बाई
162
विवरण
युवावस्था एक स्वर्णिम अवसर है जीवन को ऊँचाई देने का। यही वह समय है जो हमारे जीवन की दिशा तय करता है। एक जवान व्यक्ति या तो अपनी चेतना को आसमान की ऊँचाई दे सकता है या फ़िर कामवासना और सांसारिकता के जाल में फँसकर पतित हो सकता है।

यूँ तो एक जवान व्यक्ति के सामने चुनौतियों की कमी नहीं होती पर सोशल मीडिया के भोंडापन और बेहुदगियों ने इस समस्या को और विकराल बना दिया है। आज का एक भारतीय युवक जिस स्थिति में है वह अत्यंत गम्भीर और खतरनाक है।

ऐसे समय में एक उचित मार्गदर्शन और सशक्त पथप्रदर्शन की आवश्यकता और बढ़ जाती है। आचार्य प्रशांत की पुस्तक 'आह जवानी! आग है नसों में या है पानी' एक युवक के मानसिक और शरीरिक क्षमताओं को सही दिशा देने का एक प्रयास है।
अनुक्रमणिका
1. ठरकियों को 'बोल्ड' बोलते हो? 2. बचपन का प्यार मेरा भूल नहीं जाना रे 3. डॉक्टर हो या व्यापारी, इंस्टाग्राम क्वीन सब पर भारी 4. ये किन गानों पर नचा रहे बच्चों को? 5. मेरी मर्ज़ी मैं कुछ भी करूँ! 6. बेटा, किस क्लास में हो? गूगल करना नहीं आता?
View all chapters
क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है?
आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
योगदान दें