Combo books @99/book! 60+ combos available. FREE DELIVERY! 😎🔥
content home
Login
ज्ञानयोग [Must Read]
श्रीमद्भगवद्गीता भाष्य ४
Book Cover
Already have eBook?
Login
eBook
Available Instantly
Suggested Contribution:
₹51
₹300
Paperback
In Stock
76% Off
₹129
₹550
Quantity:
1
In stock
Book Details
Language
hindi
Print Length
231
Description
कृष्ण अर्जुन को तीसरे अध्याय में 'कर्मयोग' की सीख देते हैं पर कृष्ण जानते हैं कि ज्ञान के बिना कर्म की दिशा भटकी हुई होगी, जहाँ आत्मज्ञान नहीं होगा वहाँ कर्म निष्काम नहीं हो सकता। इसीलिए तीसरे अध्याय के ठीक बाद अर्जुन को मिलती है 'ज्ञानयोग' की सीख । ज्ञानयोग कर्मयोग से भिन्न नहीं है बल्कि कर्मयोग का आधार है। कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, "धर्म प्राप्ति के लिए अनेक मार्ग हैं, अनेक विधियाँ हैं; पर उन सबमें श्रेष्ठ है निष्काम कर्मयोग, जो आत्मज्ञान से ही संभव है।" प्रस्तुत अध्याय में कृष्ण ज्ञानयोग की सीख देकर अर्जुन के कर्म को निष्कामता की ओर ले चलते हैं। और इसी से श्रीमद्भगवद्गीता की सीख पूर्ण होती है।
Index
1. कृष्ण कौन हैं? वो कब प्रकट होते हैं? (श्लोक 4.1-4.7) 2. आम जीवन में कृष्ण को चुनने का अर्थ 3. कभी युद्ध, कभी उपेक्षा क्योंकि उद्देश्य है धर्म की रक्षा 4. कृष्ण से अगर प्रेम हो तो कृष्ण को जन्म दो (श्लोक 4.8-4.9) 5. जिधर मोहक विषय नहीं, उधर कृष्ण हैं (श्लोक 4.10) 6. कृष्ण – आवश्यक भी, अनिवार्य भी (श्लोक 4.11)
View all chapters
FAQs

Can’t find the answer you’re looking for? Reach out to our support team.

Why are the prices of the books set so low?
Can I buy both ebooks and paperback books on the website?
Is there an option to order books in bulk?
How long does it take for books to be delivered after placing an order?
Can I track the status of my book order?
Can I donate for Acharya Prashant's literature?
Where can I address queries related to print quality or delivery?
Why are all orders on the website prepaid?
Can I opt for Cash on Delivery (COD) orders?
How can I volunteer and work with the books department?