आचार्य प्रशांत: योग की दृष्टि से मन और शरीर दोनों न सिर्फ़ अन्तर्सम्बन्धित हैं बल्कि दोनों एक-दूसरे से परस्पर कार्य-कारण का सम्बन्ध भी रखते हैं। माने अगर मन पर काम करोगे तो उसका प्रभाव तन पर दिखाई देगा और तन पर काम करोगे तो उसका प्रभाव मन पर दिखाई देगा। तन स्थूल, मन सूक्ष्म।
अधिकांश व्यक्ति जिस तरह का जीवन जीते हैं, उसमें सूक्ष्म के साथ उनका परिचय बड़ा क्षीण होता है। सूक्ष्म बातें जैसे हम समझते ही नहीं। इन्द्रियाँ तो जो कुछ देखती हैं, वो स्थूल ही होता है न। और अगर आप ऐसी ज़िन्दगी जी रहे हैं जो इन्द्रियों से ही अधिकतर सम्बन्धित है। तो कुछ भी सूक्ष्म आपको दिखाई देना या समझ में आना बन्द हो जाता है, आपको बस स्थूल पदार्थ दिखाई देता है।
तो अब स्थूल तन का प्रभाव पड़ता है सूक्ष्म मन पर और सूक्ष्म मन का प्रभाव पड़ना है स्थूल तन पर। लेकिन हम काम करें किस पर? योग बड़ा व्यावहारिक विज्ञान है। वो कहता है कि मन पर हम काम करें कैसे जब मन है सूक्ष्म। और हमे कुछ भी सूक्ष्म दिखाई देता नहीं। हम उस पर कैसे कोई साधना, कोई नियन्त्रण कर लेंगे। तो मन पर काम करना बड़ा मुश्किल है। क्योंकि मन में है विचार, मन में है भावनाएँ वो तो भीतर-भीतर चोरी-चुपके चलती रहती हैं। हम कैसे उन पर कुछ बस करें, कैसे उनको लेकर कुछ अनुशासन, कुछ साधना करें। तो ज़्यादातर लोगों के लिए बड़ा मुश्किल होता है मन का रास्ता अपनाना। हालाँकि वो रास्ता श्रेष्ठ है कि मन पर काम करो तो तन और कर्म अपनेआप ठीक हो जाएँगे।
विचारों को, भावनाओं को देखकर शुद्ध और शान्त रखो तो कर्म और जीवन अपनेआप ठीक चलेंगे। ये बात श्रेष्ठ तो है पर व्यावहारिक नहीं है। क्योंकि विचार दिखाई नहीं देतें, वृत्तियों का कुछ पता नहीं चलता। बादल, धुएँ, कोहरे की तरह ये सब उठते हैं भीतर। और फिर अचानक लापता भी हो जाते हैं। बह जाते हैं कहीं।
तो योग कहता है कि ज़्यादातर लोगों के लिए तो ये सम्भव ही नहीं है कि वो मन पर काम करें। ताकि उनका जीवन बेहतर हो। तो योग उल्टा रास्ता लेता है, वो कहता है, तन पर काम करते हैं। क्योंकि तन तो है स्थूल और स्थूल तन सबको दिखाई देता है। भले ही सूक्ष्म मन दिखाई देता हो या न दिखाई देता हो। कोई सामने से चला आ रहा हो, उसके मुँह पर कालिख लगी हो, उसके कपड़े मैले हों आप तुरन्त उसे टोक दोगे या तुरन्त उसके मैलेपन पर आपका ध्यान चला जाएगा और अगर उसके शरीर और कपड़ों से दुर्गन्ध भी उठ रही है तो आप उससे दूर भी शायद हो जाओगे। है न? लेकिन अगर कोई सामने से आ रहा हो, जिसका मन मैला हो तो क्या आप उसे टोक देते हो या उससे दूर हो पाते हो? नहीं हो पाते न?




