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ये उम्र रिश्तेबाज़ी में मत गँवाओ || नीम लड्डू
Author Acharya Prashant
Acharya Prashant
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ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर। और लड़के भी तुम्हें किस नज़र से देखते हैं और खिंचे चले आते हैं। अपनी छोटी-छोटी हरकतों पर, विचारों पर ध्यान दो तो जो ये पूरा लड़का-लड़की का खेल होता है इसकी असलियत ज़ाहिर हो जाएगी।

फिर कम-से-कम तुम इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले पाओगी, इसे बहुत सम्मान नहीं दे पाओगी। एक चुटकुले की तरह इसको ले लो तो कोई बात नहीं। लेकिन अगर एक चुटकुले की तरह लोगी तो फिर जब ब्रेकअप होगा उस रात फूट-फूट कर रो भी नहीं पाओगी।

फिर तो चुटकुला था वो लड़का। ठीक है ज़िन्दगी में था, तुम्हें भी पता था वो क्यों है और उसे भी पता था वो क्यों है। निकल गया तो निकल गया। रात गयी, बात गयी।

अभी दिक़्क़त ये होती है कि खेल तो सारा होता है जिस्मानी, लेकिन तुमने अपने-आपको ये समझा रखा होता है कि बात भावनाओं की है।

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