खुशियाँ बहुत स्तरों की होती हैं। खुशी पाने के लिए तुम्हें यह जानना चाहिए कि मुझे किस स्तर की खुशी चाहिए। आम आदमी की खुशी वह होती है जो अपने पीछे ग़म और उदासी लेकर आती है, जबकि बुद्ध की खुशी उच्चतर स्तर की और असली होती है। जो भी अपने सामर्थ्य से बढ़कर कुछ ऊँचा करता है, उसे ऊँची खुशी मिलती है। जितने ऊँचे स्तर की तुम खुशी चाहोगे, उतने ही ऊँचे स्तर का तुम्हारा जीवन होगा।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: सर, नमस्कार।
आचार्य प्रशांत: नमस्कार।
प्रश्नकर्ता: तो आचार्य जी, आपने आइआइएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) क्रैक किया। आइआइटी (भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान) क्रैक किया। आइएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) भी; लेकिन उसके बाद कॉरपोरेट लाइफ़ छोड़कर आपने प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन शुरू करी। तो आपके हिसाब से व्हाट इज़ अ सक्सेसफुल लाइफ़ (सफल जीवन क्या है)?
आचार्य प्रशांत: देखिए, हम कहते हैं, 'हमें कुछ करना है, चाहे आइआइटी के बाद करना है, आइआइएम के बाद करना है या किसी भी और चीज़ के बाद करना है।' या कुछ हम कहते हैं, ‘हमें हासिल करना है, कुछ बनना है।’ ऐसा हम सभी कहते हैं। तो इससे जाहिर है कि हमें कहीं कोई कमी दिख रही होती है न, तभी तो हम कुछ बनना चाहते हैं या हासिल करना चाहते हैं। हम जो कहते हैं न कि बिकमिंग (होना), वो बिकमिंग इसीलिए है क्योंकि हमें कहीं-न-कहीं कुछ खोट दिख रही होती है। कुछ ऐसा होता है जिसे ठीक किया जाना ज़रूरी है। कुछ ऐसा है, जो वैसा नहीं है जैसा उसे होना चाहिए। तो




