आचार्य प्रशांत: जो कुछ होली के नाम पर होता है उसमें प्रह्लाद तो कहीं नहीं है उसमें होलिका-ही-होलिका है लोगों ने ये जो नाम है होली लगता है इसका कुछ गलत अर्थ कर लिया। उन्हें लगा होली का मतलब है कि आज होलिका माता को याद करना है और उनको प्रेम से श्रद्धांजलि अर्पित करनी है। बेचारियों ने अपनी शहादत दी थी आज।
होली का मतलब समझते हैं हम क्या है? होली का मतलब है कि कोई भी कीमत देनी पड़ जाए और कितना भी ताकतवर हो झूठ उसका साथ नहीं देना है। हिरण्यकश्यप सिर्फ़ राजा ही नहीं था, प्रह्लाद का बाप भी था और वो छोटू ने कहा कि तुम चाहे राजा हो, चाहे बाप हो मेरे, तुम्हारा साथ तो नहीं दूँगा। और वो कोई साधारण राजा नहीं था, वो वरदान प्राप्त राजा था अगर पौराणिक कथा पर विश्वास करें तो।
कथा कहती है कि उसने वरदान ले लिया था दिन में नहीं मरेगा, रात में नहीं मरेगा, अस्त्र से नहीं मरेगा, शस्त्र से नहीं मरेगा वगैरह-वगैरह’ आदमी से नहीं मरेगा, पशु से नहीं मरेगा। बहुत खतरनाक राजा था, समझ रहे हो बात को?
इतना खतरनाक था कि उसने पूरे राज्य में पाबन्दी कर दी थी कि भाई अब कोई किसी सत्य का या ईश्वर वगैरह का नाम नहीं लेगा। मेरी पूजा करो मेरी क्योंकि सत्य अमर होता है न और अनन्त जिसका कोई अन्त नहीं हो सकता मेरा भी अन्त नहीं हो सकता क्योंकि मर तो अब मैं सकता ही नहीं। जो न जल में मर सकता, न थल में मर सकता, न दिन में मर सकता, न रात में मर सकता वो तो अमर ही गया। तो मैं ही अमर हूँ, मैं ही सत्य हूँ तो मेरी ही पूजा करो और वो छुटके ने बोला कि नहीं, नहीं चलेगा।
जैसे वो राजा खतरनाक था वैसे वो बाप खतरनाक था क्योंकि उसकी एक ज़बरदस्त बहन थी। और बहन के पास कहते हैं कि एक शक्ति थी, कहीं कहा जाता है कि एक दुशाला जैसा था। पूरा राज्य मान रहा है राजा साहब की बात, छोटे ने मानने से मना कर दिया। बोला, ‘मैं तो नहीं मानता।’ तो राजा ने कहा, ‘अपने हाथों से उसको क्या मारूँ, बुरा लगेगा।’ पहले तो उसको बहुत लालच दिए और बहुत डराया-धमकाया भी। वो काहे को माने! बोला, ‘मैं नहीं मानता। आप होंगे मेरे बाप, चाहे आप होंगे राजा, चाहे आप होंगे वरदान प्राप्त मैं नहीं मानता तो नहीं मानता। मेरे लिए सच ही सच है, सच ही बाप है, कोई बाप सच से बड़ा नहीं होता।’ तो देवी जी आयी हैं। देवी जी को कहा गया है कि इसको न चुपचाप गोद में बैठाकर के आग से गुज़र जाओ, तुम्हें तो कुछ नहीं होगा यह मर जाएगा।







