कभी स्कूल गए हो वहाँ कभी किसी तीसरी क्लास के लड़के को पहली क्लास के लड़के को धुनते देखा है? देखा है? तो वही है ये। तीसरी क्लास वाले ने पहली क्लास वाले को पकड़ के पटापट- पटापट- धुन दिया, और यही है। इसका कुछ नहीं है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आचार्य जी, मेरा जो सवाल है, वो हाल ही में अमेरिका द्वारा की गई वेनेज़ुएला स्ट्राइक को लेकर है। सवाल ये है कि अमेरिका में एक तरफ़ हमें सबसे पुराना लोकतांत्रिक ढाँचा देखने को मिलता है, और दूसरी तरफ़ वेनेज़ुएला में जो स्ट्राइक की है यूएस ने, वो किसी भी रूप में लोकतांत्रिक देश द्वारा।
आचार्य प्रशांत: मेरे पास कुछ नहीं है, बेटा, बोलने को। देखो, गुंडागर्दी की दुनिया है, तुम्हें उसमें सवाल क्या उठ रहा है। कोई भी किसी के घर से कुछ भी उठा ले जा सकता है। जिसके पास ताक़त है, जिसकी लाठी, उसकी भैंस। इसमें मैं क्या बता सकता हूँ? ये व्यवहारिक जगत है। क्या समझाया था? दो ही केंद्र होते हैं, या तो ट्रुथ का, नहीं तो पावर का। और जिस दुनिया में सत्य का केंद्र तिरस्कृत होता है, वहाँ सब कुछ पावर से चलता है। जिसके पास लाठी है, जिसके पास मिसाइल है, वो जो चाहे कर ले; वो तुम्हें तुम्हारे घर से उठा ले। तुम क्या कर सकते हो? इसमें कोई रहस्य नहीं है कि जिसका मैं आध्यात्मिक कुछ निदान दूँगा। ये तो वही है, छोटे गाँव-क़स्बों में अभी भी होता है, जहाँ पर कोई रूल ऑफ़ लॉ नहीं है। कोई भी कहीं भी घुस जाता है, किसी को उठा लेता है।
हमारे बिहार में तो अभी कुछ सालों पहले तक ये तक होता था कि अपहरण करके शादियाँ भी कर लेते थे; दुल्हन का ही नहीं, दूल्हे का। इसकी नौकरी-वौकरी लग गई, उसे घर से उठवा लिया, शादी कर ली हो गया, बस। क्या करें, इसमें कुछ नहीं है। मैं इसमें कोई गुप्त रहस्य निकाल के नहीं दे पाऊँगा।




