UPSC छात्र का बेबाक साक्षात्कार (जिनमें दम हो, वो ही देखें) || आचार्य प्रशांत (2023)

प्रश्नकर्ता सर, समाज में कुछ लोगों का दावा होता है कि वो समाज कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं। लेकिन उसमें भी उनकी कामना छुपी हुई होती है। लेकिन कुछ लोग सचमुच ऐसा समझते हैं कि वो काम इसीलिए करना चाहते हैं क्योंकि वो वाक़ई समाज कल्याण करना चाहते हैं। तो वो अपनी छुपी हुई कामना को कैसे देखें?
आचार्य प्रशांत: उन लोगों को पूछने दो न। आपका क्या सवाल है?
प्र: सर, मेरा प्रश्न ये है कि जैसे मुझे ये लगता है कि मैं यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) सिविल सर्विसेज़ (नागरी सेवाएँ) परीक्षा पास करके समाज सेवा करना चाहता हूँ। मुझे वाक़ई ऐसा लगता है। तो इसमें भी क्या मेरी कोई छुपी हुई कामना है?
आचार्य: (मुस्कुराते हुए) अच्छा अगर नहीं मिलती है सरकारी नौकरी, कहीं कोई साधारण प्राइवेट जॉब करनी पड़ती है, तो करोगे समाज सेवा? और अगर करोगे तो उतनी ही करोगे जितनी वो नौकरी वगैरह पाने पर करते? ये प्रश्न है। अगर उस नौकरी में, सरकारी नौकरी में पद, रुतबा, तनख़्वाह न मिल रही हो तो भी करोगे समाज सेवा? ये कुछ सवाल हैं जिनका ख़ुद को ही ईमानदारी से जवाब देना होता है। ठीक है?
अपनी नज़र में हर कोई अच्छा ही रहना चाहता है। मैंने हायरिंग (नियुक्तियों) के लिए अपनी संस्थाओं में भी, और पहले जब मैं नौकरी करता था तो उन लोगों के लिए भी इंटरव्यू खूब लिये हैं। और जितने आकर के बैठते थे, सबके बड़े ऊँचे-ऊँचे, शुद्ध, दूध में धुले, नैतिक और लोक कल्याण के दावे होते थे। और मुझे इससे ज़्यादा मज़ा नहीं आता था किसी काम में कि दावों को बिलकुल खोलकर रख दूँ।



