आपको पता हो कि कोई चीज़ अभी सुख देगी लेकिन चार दिन बाद दुख देगी, फिर भी आप उसे ठुकराने के बजाय स्वीकार करोगे। क्रेडिट कार्ड स्वाइप करते समय सोचते हो, 'अभी मौज कर लो, आगे की देखी जाएगी।' ये जानवरों की हरकत है। कर्ज़ लेना हो तो सौ बार पूछो, 'क्या यह जरूरी है?' सौ बार जवाब 'हाँ' हो, तभी लो। कोई चीज़ ललचाए तो उसे टालो, और अगर आवश्यक हो, तो पहले पैसा जोड़ो, बाज़ार के शिकार मत बनो।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मैं इकोनॉमिक्स और बिजनेस स्टूडेंट(अर्थव्यवस्था और व्यवसाय का छात्र) हूँ। तो मेरा प्रश्न ये है कि इण्डिया (भारत) में कुछ सालों पहले यूपीआई(एकीकृत भुगतान इंटरफेस) आयी और यूपीआई ने पेमेन्टगेटवे(भुगतान का माध्यम) का एक इन्फास्ट्रक्चर(अवसंरचना) बनाया। और जैसे हमको पता है कि कैश(नकद) देनें में थोड़ा फ्रिक्शन(टकराव) आता है। आप अपने कार्ड से ट्रांज़ैक्शन(लेनदेन) करते हैं तो फ्रिक्शन कम हो जाता है लेकिन यूपीआइ में न के बराबर। सेम गोज़ विद क्रेडिट कार्ड (ऐसा ही क्रेडिट कार्ड के साथ होता है) आप क्रेडिट कार्ड में ज़्यादा खर्चे करते है एज़ कम्पेयर टू डेबिट कार्ड( डेबिट कार्ड की तुलना में )।
तो मेरा प्रश्न ये है कि आजकल जो स्टार्ट-अपस्(व्यवसाय) आ गयी हैं, जो बीएनपीएल बाय नाओ पे लेटर (अभी पाओ, बाद में चुकाओ) है, जो छोटे धनराशि जैसे, दो हज़ार से लेकर पचास हज़ार तक के अमाउन्ट को लोन पर देती हैं विदाउट एनी क्रेडिट स्कोर( बिना किसी क्रेडिट स्कोर के) और कुछ भी और लोगों को प्रोत्साहित कर रही कि और खर्च करें तो और लोग, और ऐसा अमेरिका में भी देखा गया था कि जब बहुत ज़्यादा पैसे देने लग गये थे तो




