पाकिस्तान के पागलपन की वजह: दो राष्ट्र सिद्धान्त (Two Nation Theory)

भारत का विभाजन हुआ था राजनीतिक तौर पर। मोहम्मद अली जिन्ना का यही तर्क था। वो कहते थे कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग कौमें नहीं हैं, ये दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। कहते थे कि ये लोग बिल्कुल अलग-अलग हैं। और चूँकि ये अलग-अलग राष्ट्र हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग राज्य भी बना देना चाहिए।" तो राष्ट्र किस आधार पर? चुन लिया कि धर्म के आधार पर हम चुनेंगे। और जो आप कह रहे हैं कि जड़ उसकी — यही लड़ाई है — आज तक।
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अंकित त्यागी: नमस्कार, एनडीटीवी की विशेष पेशकश में एक बार फिर से आपका स्वागत है। मेरे साथ एक बार फिर लेखक, दार्शनिक, आईआईटी-आईआईएम के पासआउट, आचार्य प्रशांत जी हैं। आज ज्वलन्त मुद्दों पर बात करने के साथ-साथ उनकी कुछ जो किताबें हैं और उनमें इस वक्त में, जो किताब अपने हाथ में पकड़ा हुआ हूँ — “भारत आध्यात्म, दर्शन और राष्ट्र” — उससे कैसे तार्किक, अभी जो स्थितियाँ बन रही हैं देश में, या जिस तरीके की घटनाएँ हो रही हैं, उसे जोड़ के कुछ चीज़ें, क्योंकि बड़ी इंटरेस्टिंग हैं। मैंने किताब पढ़ी और उसमें कुछ जो सवाल निकल कर आते हैं, मैं कोशिश करुँगा उसका जवाब आचार्य प्रशांत जी से आज लिए जाए।
आचार्य प्रशांत: जरूर।
अंकित त्यागी: मैं सबसे पहले, क्योंकि हम जब इस पर बात कर रहे हैं, तो भारत-पाकिस्तान के बीच में काफी तनाव रहा है, और स्थिति अब धीरे-धीरे शायद दोबारा थोड़ी शांति की तरफ बढ़ रही है। लेकिन तीन-चार दिन काफी तनाव भरे रहे। उसको लेकर मैं शुरू करना चाहता हूँ, आपके नजरिए से समझना चाहता हूँ कि ये जो दोनों देशों के बीच में तनाव हुआ, या जिस तरीके से बिल्कुल युद्ध जैसी एक स्थिति बन गई — आप उसे किस तरीके से देखते हैं? क्या ये एक कन्टिन्युअस प्रोसेस, एक साइकिल



