तुलना तुम्हारा जोकर बना देती है, जो हो नहीं वो बनकर घूम रहे हो। जो तुम हो वही अभिव्यक्त हो जाता है। तुम्हें कैसे पता चलेगा कि तुम्हें भूख लगी है कि नहीं? तुलना करोगे? तुलना करोगे क्या? तुम्हें एक सौ चार बुखार है और सभी को बुखार है एक सौ चार — तो ये कहोगे कि मैं स्वस्थ हूँ क्योंकि तुलना से तो यही पता चल रहा है, जितना सबका है उतना मेरा भी है!
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जापान ने इतनी जल्दी तरक्की कर ली तो क्या उन्होंने भी किसी से तुलना करके ये सब किया?
आचार्य प्रशांत: तुम्हें वाकई लगता है उन्होंने कम्पेरिज़न करा? किस जापानी ने तुम्हें बताया है?
प्रश्नकर्ता: सर, किसी ने बताया नहीं लेकिन…
आचार्य प्रशांत: किस जापानी ने बताया है? बताओ न!
प्रश्नकर्ता: वो हर चीज़ में बहुत आगे हैं।
आचार्य प्रशांत: अरे हैं बड़े, आगे हैं! पर वो जितनी बुरी हालत में थे — उन पर तो एक ही एटम बम गिरा था, तुम्हारे भारत देश को देखकर लगता है रोज़ ही एटम बम गिरते हैं।




