
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक्चुअली कल भी आपसे एक प्रश्न पूछना था, पर कल नहीं हो पाया। आपने बोला था कि हम लोगों का रिलिज़न जो है, वो एक बैरियर है, हम लोगों के लिए एक वॉल जैसा है; पर आचार्य जी, जब आपने ऐसा बोला तो आपने पैलेस्टाइन का एग्ज़ाम्पल दिया, कश्मीर का एग्ज़ाम्पल दिया। बट, इज़न्ट इट अबाउट मोर लैंड एंड रिलिज़न?
एंड मैंने आपके वीडियोज़ भी सुने हैं। उसमें आपने बोला है कि जो महाभारत युद्ध हुआ है, पांडव ने पूछा, पाँच विलेजेस के लिए। तो वो लैंड के लिए है न जो वॉर हुआ है, लैंड के लिए, रिलिज़न के लिए?
आचार्य प्रशांत: उसको 'धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे' क्यों बोला श्रीकृष्ण ने? अगर ज़मीन के लिए लड़ाई थी तो उसको धर्म युद्ध क्यों बोला? और अगर सिर्फ़ ज़मीन की लड़ाई थी तो उसमें इतना बड़ा धर्मग्रंथ फिर कैसे खड़ा हो गया, भगवद्गीता?
हम कारण खोज लेते हैं: कभी ज़मीन के कारण होगा, कभी कोई और कारण होगा। ज़मीन काफ़ी बड़ा कारण होता है। लेकिन आप ज़मीन के लिए भी लड़ रहे हो तो ये बात इंगित करती है अधर्म को। आप जब लड़ना चाहते ही हो न, तो कोई न कोई कारण या बहाने जैसा वो निकल ही आता है। अगर कारण नहीं होगा तो कुछ और। कई बार तो कोई कारण नहीं होगा; आप बस कुछ काल्पनिक वजह निकाल लोगे और उसमें आप लड़ना शुरू कर दोगे। हम इंसान हैं, हमारी जो आइडेंटिटी होती है उसमें बहुत सेंट्रल रोल होता है रिलीज़न का। क्योंकि रिलिज़न आकर इस क्वेश्चन का आंसर दे देता है — "हू ऐम आय?" वो सही देता है, गलत देता है, फिक्टिशस आंसर देता है। वो अलग बात है।
और जितने भी रिलिज़नल सिस्टम्स हैं न, वो सब आकर इसका आंसर दे देते हैं कि आप कौन हो। और कई तरीके से आंसर दे देते हैं, कई लेवल्स पर आंसर दे देते हैं। जहाँ से आपकी सबसे डीप इनक्वायरी का आंसर आ रहा होता है न, वो जगह आपके लिए बहुत मीनिंगफुल हो जाती है। आप अगर किसी से मिलो और आपने पूछा, "हू आर यू? अपने बारे में दो-चार बातें बताओ?” एक तो वो अपना जेंडर बता देगा, नाम बता देगा, और उसके बाद वो जल्दी से रिलिज़न ही बताएगा अपना। और कई बार तो लोग जेंडर और नाम या नेशनलिटी भी न बताएँ, वो सबसे पहले यही बताएँगे: "मैं हिंदू हूँ, क्रिश्चियन हूँ, मुस्लिम हूँ," कुछ और हूँ। तो जो रिलिज़न का मुद्दा है न, वो इसलिए बहुत सिग्निफिकेंट हो जाता है हर इंसान के लिए, क्योंकि हमने अपनी फंडामेंटल आइडेंटिटी ही रिलिज़न से ली होती है।
तो रिलिज़न के हटने का मतलब होता है मैं ही हट जाऊँगा; मेरी आइडेंटिटी ही वो है, मैं ही बर्बाद हो जाऊँगा। समझ रहे हो? तो जिसने रिलिज़न से आइडेंटिटी ली है, जो कहता है कि "मैं फलाने रिलिज़न का हूँ,” वो कह रहा है मेरी हस्ती ही मेरा रिलिज़न है। अब आप फिर अगर रिलिज़न पर सवाल खड़ा करते हो न, आप उसकी बीइंग पर ही प्रश्न खड़ा कर देते हो; वो उसके लिए डेथ जैसा होता है और डेथ तो किसी को अच्छी नहीं लगती। देन वी विल फाइट, एज़ अ डाइंग वन फाइट्स टू सेव हिज़ लाइफ़। समझ रहे हो?
इसीलिए और चीज़ों को ज़्यादातर लोग फिर भी भले ही इग्नोर कर दें, बट व्हेन इट कम्स टू अ क्वेश्चन ऑफ रिलिज़न, मोर पीपल आर मोर लाइकली मोर वर्क्ड अप ऐंड ऑफ़ेन्डेड, बिकॉज़ दे हैव टेकन दैट सोर्स ऐज़ द बेसिस ऑफ़ देयर आइडेंटिटी। समझ रहे हो न? वही चीज़ है जो बिल्कुल उनकी बुनियाद है, उनकी ज़मीन है जिस पर वो खड़े हुए हैं। आप जब रिलिज़न को क्वेश्चन करोगे, या कहोगे कि तुम्हारे रिलिज़न से मेरा रिलिज़न बेहतर है, तो आप उनकी ज़मीन ही हिला देते हो। या कह दोगे कि रिलिज़न फेक होते हैं, आपने ये भी कह दिया मान लो, तो भी आप उनके नीचे की ज़मीन ही हिला देते हो। फिर वो लड़ेंगे।
अब इसी तरीके से, आपने अपनी हस्ती की बुनियाद भी बना रखा है रिलिज़न को। और आप कहते हो, मेरा गॉड है, वो ऐसा है, वो ऐसा है, उस गॉड ने ये सब किया था। गॉड को लेकर आपकी कहानियाँ हैं पूरी, पूरा स्टोरीज़ का सिस्टम है आपके पास। दूसरा बंदा आता है, वो कहता है, नहीं, गॉड ऐसा है। और उसके पास दूसरी स्टोरीज़ हैं, और सब रिलिज़न्स के पास अलग-अलग स्टोरीज़ हैं। अब अगर उसकी स्टोरी सच है, इसका मतलब क्या हुआ? आपकी स्टोरी झूठ है।
तो इसका मतलब जहाँ भी कोई रिलिज़ियस सिस्टम होगा, ऑर्गेनाइज़्ड रिलिज़न होगा, जिसमें स्टोरीज़ बहुत होंगी, बिलीफ़्स बहुत होंगी, वहाँ इमीडिएटली एक समस्या खड़ी हो जाएगी, स्ट्रगल खड़ी हो जाएगी। “अगर मेरी सही है, तो उसकी गलत है,” और अगर वो बोल रहा है उसकी सही है तो मेरी गलत हो गई। तो अब तो लड़ाई होगी न।
तो अब इसमें दो बातें निकल के आ रही हैं, एक तो वो बहुत सिग्निफिकेंट है आपके लिए, और दूसरा एक्सक्लूसिव है। अगर आपकी स्टोरी सही है, तो उसकी सही नहीं हो सकती। योर स्टोरी हैज़ टू बी एक्सक्लूसिवली राइट। गेटिंग इट? व्हिच मीन्स यू विल हैव टू फाइट। तो इसीलिए दुनिया में स्ट्राइफ़ का, कॉन्फ्लिक्ट का बहुत बड़ा कारण रहा है रिलिज़न। कौन-सा वाला रिलिज़न? स्टोरीज़ वाला रिलिज़न, जिसमें बिलीफ़्स बहुत होती हैं कि ऐसा मानो, वैसा मानो, ये करो, वो करो। वो तो लड़ेंगे तो रिलिज़न के नाम पर।
रिलिज़न का ऑर्गेनाइज़्ड बिलीफ़-बेस्ड सिस्टम वाला जो रिलिज़न होता है, उसका मतलब ही हो गया अब लड़ाई होकर रहेगी। योर गॉड इज़ पर्पल, माय गॉड इज़ ब्लू, एंड बोथ ऑफ अस कैन नॉट बी साइमल्टेनियस्ली ट्रू। सो वन ऑफ अस हैज़ टू बी फॉल्स। वन ऑफ अस इज़ लाइंग। हर गॉड इज़ पर्पल, माय गॉड इज़ ब्लू। और पर्पल एंड ब्लू गॉड तो कोई हो नहीं सकता, या कि ग्रीन एंड ब्लू, या रेड एंड वाइट गॉड तो कोई हो नहीं सकता। तो अब तो लड़ेंगे, या तो तू बचेगी या मैं बचूँगा, अब तो वो वाला रहेगा। देयर कैन बी नो को-एक्ज़िस्टेन्स, क्योंकि दोनों बातें एक-दूसरे से कम्पैटिबल ही नहीं हैं।
एंड नो टू स्टोरीज़ कैन एवर बी कम्पैटिबल। फैक्ट्स कैन बी कम्पैटिबल विद ईच अदर, बट स्टोरीज़ कैन नॉट बी कम्पैटिबल विद ईच अदर। उसकी कुछ भी स्टोरी है, मेरी कुछ भी है, अब इन दोनों में रिकन्सिलिएशन तो होगा नहीं। तो अब लड़ाई होती है ज़बरदस्त। इसीलिए
ट्रू रिलिज़न वो है जिसमें स्टोरीज़ के लिए कोई जगह नहीं है। वहाँ स्टोरी होती है रिफ्लेक्शन के लिए, रिफ्लेक्शन माने ख़ुद को देखना। वो स्टोरी नहीं है, वो फ़ैक्ट है, अपनी हक़ीक़त, अपनी सच्चाई।
नॉट स्पेक्युलेशन कि “मुझे गॉड ने कब बनाया, गॉड ने पहले आदमी बनाया कि औरत बनाई, गॉड का फ़ेवरेट ऐनिमल कौन-सा है, गॉड ने क्या बोला है, कौन-से ऐनिमल को मार दो, कौन-से ऐनिमल को गॉड ने बोला मत मारो, गॉड ने कितने दिन में अर्थ बनाई?”
अब ये सब क्या हैं? स्टोरीज़। अब कोई बोल रहा है, गॉड ने अर्थ फाइव डेज़ में बनाई। कोई बोल रहा है, फिफ़्टीन डेज़ में बनाई। अब इन दोनों में लड़ाई तो होगी न? क्योंकि या तो फाइव में बनाई होगी या फिफ़्टीन में बनाई होगी। तो दोनों में से एक तो झूठ बोल रहा है। हर कोई कहेगा, मैं सच हूँ, तू झूठ बोल रहा है। वो बोला, नहीं, तू झूठा है! तो ग़ुस्सा आएगा, तो लड़ाई हो जाएगी। देयरफ़ोर,
ट्रू रिलिजन कैन नॉट इन्क्लूड एनी स्टोरी। ट्रू रिलिजन कैन नॉट इन्क्लूड एनी बिलीफ़। ट्रू रिलिजन कैन ओनली इन्क्लूड वेरी ऑनेस्ट सेल्फ-ऑब्ज़र्वेशन।
*प्रश्नकर्ता: सो व्हाट इज़ ट्रू रिलिजन?
आचार्य प्रशांत: यही है, अपने बारे में बेईमानी न करना। अपनी ज़िंदगी को लेकर ऑनेस्ट रहना। सो इफ़ यू आर जैलस, यू एक्नॉलेज दैट यू आर जैलस। इफ़ यू आर अफ्रेड, यू एक्नॉलेज दैट यू आर अफ्रेड। यू डोंट सप्रेस थिंग्स। यू डोंट पुट ऑन मास्क। ठीक है?
किसी की प्रेज़ेन्स में आप बिल्कुल ऐन्क्शस हो जाते हो, तो ये नहीं करना कि “नहीं, नहीं, ही स्टिल लव्स मी।” या इफ़ ही स्टिल लव्स यू, मेक्स यू ऐन्क्शस, व्हाट्स गोइंग ऑन? दे आस्क क्वेश्चन्स, रियल रिलिज़न वुड इन्क्लूड अ लॉट ऑफ क्वेश्चन्स। द स्पिरिट ऑफ क्वेश्चन, द स्पिरिट ऑफ एक्सप्लोरेशन, इन्क्वायरी। ये चीज़ें ट्रू रिलिज़न में बहुत इम्पॉर्टेंट होती हैं।
दो लोगों का साथ बैठकर कोशिश करना कि हम समझें कि दुनिया क्या है, ज़िंदगी क्या है, चल क्या रहा है? हम कहाँ कैसे सोच रहे होते हैं? हमारी ड्रीम्स कहाँ से आती हैं? हमारे टारगेट्स कहाँ से आते हैं? रिलेशनशिप्स क्या होती हैं, है न? डेथ क्या है? लाइफ़ क्या है? लव क्या है? व्हेन यू गो टू द एसेंशियल क्वेश्चन्स ऑफ लाइफ़, लाइफ़ ही क्या है?
व्हेन यू गोइंग टू दी क्वेश्चन्स, एंड नॉट जस्ट वन्स, बट कंटिन्यूअस्ली, यू आर कंटिन्यूअस्ली ऑब्ज़र्विंग लाइफ़। दैट इज़ रिलिज़न वो ट्रू रिलिज़न है। उसमें ये सब नहीं है, ऐसा-वैसा जादू, मिरेकल्स, सुपरस्टिशन, ये कहानी, वो कहानी। ट्रू रिलिज़न में इन सबके लिए कोई जगह नहीं होती। नो मिरेकल, नो सुपरस्टिशन, बट डीप-डीप ऑनेस्टी।
प्रश्नकर्ता: ऑनेस्टी अबाउट वन्स।
आचार्य प्रशांत: अबाउट वन्स, एंड वन्स रिलेशनशिप विद द वर्ल्ड। व्हेन आइ लुक ऐट अ डॉग, हाउ डू आइ फ़ील? वर्सस व्हेन आइ लुक ऐट मटन ऑर चिकन, हाउ डू आइ फ़ील? बीइंग वेरी ऑनस्ट अबाउट इट।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, दिस इज़ एक्चुअली सिंपल क्वेश्चन, ऐज़ अ स्टूडेंट…
आचार्य प्रशांत: व्हिच क्लास?
प्रश्नकर्ता: आई एम इन नाइन्थ। सो वी आर ऑलवेज लाइक, वी हैव टू गो टू आईआईटी, वी हैव टू क्रैक यूपीएससी। लाइक, इट्स आवर गोल। ऐंड यू हैव डन ऑल ऑफ देम, ऐंड देन, व्हाइ डिड यू जस्ट प्ले दैट? लाइक, वी आर टोल्ड दैट दैट्स द वे, द बेस्ट इन ऑल।
आचार्य प्रशांत: यू आर कैरिंग दिस बुक, राइट? व्हाट इफ़ यू गेट अ मच-मच बेटर बुक, विल यू स्टिल कैरी दिस? यू विल कैरी दैट, राइट? सो, दैट्स व्हाट। देयर इज़ अ काइंड ऑफ लाइफ़ दैट यू गेट बाय बीइंग अ मैनेजर, एन इंजीनियर, ऑर अ ब्यूरोक्रैट, देयर इज़ अ पर्टिक्युलर लाइफ़ इन स्टोर फ़ॉर यू। इफ़ आई गेट समथिंग बेटर, आई विल गो फ़ॉर इट। नेक्स्ट मस्ट कम द क्वेश्चन ऑफ, व्हाट इज़ बेटर देन दैट? राइटिंग कोड्स, बिल्डिंग ब्रिजेज, दैट्स अ मीन्स टू समथिंग, राइट? सिमिलर्ली, मैनेजिंग अ फ़र्म, एनी काइंड ऑफ फ़र्म, इट कुड बी दिस बुकस्टोर, ऑर इट कुड बी अ जॉइंट मल्टीनैशनल कॉरपोरेशन, एनीथिंग। ऑल दैट इज़ अगेन अ मीन्स टू समथिंग।
व्हाट इफ़ दैट “समथिंग” कैन बी अप्रोच्ड मोर क्लोज़ली विदआउट द मीन्स? वोंट यू डू दैट? आपको जहाँ जाना है, वहाँ के लिए आप एक बहुत लंबा रास्ता क्यों लोगे? ऑल डिज़ायर्स आर सो दैट वन डे,मीऐंडरिंग, मीऐंडरिंग, मीऐंडरिंग, यू विल कम टू फुलफ़िलमेंट। इसीलिए होती हैं सारी डिज़ायर्स। चाहे वो ये हो कि मैं बहुत बड़ा इंजीनियर बन जाऊँ, या ये बन जाऊँ, वो बन जाऊँ, इसीलिए होता है। ऐसे-ऐसे आपकी जो डिज़ायर्स हैं, वो एक दिन आपको फुलफ़िलमेंट पर ला देंगी।
व्हाट इफ़ वन सीज़ दैट देयर इज़ अ डायरेक्ट रूट टू फुलफ़िलमेंट? फिर आप वो काम करोगे न? दैट्स द आंसर।
प्रश्नकर्ता: ब्लेसिंग?
आचार्य प्रशांत: यू हैव माय ब्लेसिंग। प्रज्ञा?
प्रश्नकर्ता: प्रगण्य।
आचार्य प्रशांत: प्रज्ञा। यू नो व्हाट दैट मीन्स? अ ब्यूटीफ़ुल वर्ड।
प्रश्नकर्ता: बुद्धि।
आचार्य प्रशांत: नॉट जस्ट बुद्धिस्ट विद दैट "प्र” इट डज़न्ट मीन्स जस्ट इंटेलेक्ट, बुद्धि इज़ इंटेलेक्ट। प्रज्ञा इज़ विज़डम, विज़डबियॉन्ड इंटेलेक्ट। दैट्स माय सिस्टर’स नेम ऑल्सो, प्रज्ञा।
एंड कॉरस्पॉन्डिंगली, यू नो हू इज़ अ प्राज्ञ? द पर्सन विद द हाईएस्ट विज़डम, प्राज्ञ पुरुष। पुरुष डज़ मीन मैन, पर्सन। प्राज्ञ पुरुष। प्रज्ञा इज़ वेरी ब्यूटीफ़ुल टर्म, अकर्स इन द भगवद्गीता ऑल्सो।
श्रोता: एंड हर ड्रीम इज़ टू बिकम एन आईएएस ऑफिसर।
आचार्य प्रशांत: फॉर दैट, प्रज्ञा विल हैव टू बी स्थितप्रज्ञा।
श्रोता: एंड आफ्टर सीइंग योर वीडियोज़, एंड व्हेन यू सेड, इन फ़र्स्ट अटेम्प्ट इटसेल्फ, यू ऑल क्रैक आईआईटी, आईआईएम, ऑल दी थिंग्स, एंड ईवन सिविल सर्विस ऑल्सो।
आचार्य प्रशांत: बट, इफ़ शी टेक्स माय एग्ज़ाम्पल, शी विल गो टू दोस प्लेसेज़, बट नॉट टेक अप जॉब्स।
श्रोता: समथिंग इज़ देयर विद यू, व्हिच इज़ बियॉन्ड।
आचार्य प्रशांत: हाँ, वहाँ पर जो काम है, वो कठिन है, पर उसको करने वाले बहुत लोग हैं। ये काम करने के लिए कोई आगे ही नहीं आ रहा था, मैंने सोचा, मैं ही कर लेता हूँ। वो काम करने के लिए तो बहुत लोग तैयार थे।