The spirit of question. दो लोगों का साथ बैठ के कोशिश करना कि हम समझें कि दुनिया क्या है? ज़िंदगी क्या है? हम कहाँ कैसे सोच रहे होते हैं? हमारी ड्रीम्स कहाँ से आती हैं? डेथ क्या है? लाइफ़ क्या है? लव क्या है? When you go into these questions and not just once, but continuously, you are continuously observing life — वो ट्रू रिलिजन है। उसमें जादू, ये कहानी, वो कहानी इन सब के लिए कोई जगह नहीं होती। नो मिरेकल, नो सुपरस्टिशन, बट डीप डीप ऑनेस्टी।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक्चुअली कल भी आपसे एक प्रश्न पूछना था, पर कल नहीं हो पाया। आपने बोला था कि हम लोगों का रिलिज़न जो है, वो एक बैरियर है, हम लोगों के लिए एक वॉल जैसा है; पर आचार्य जी, जब आपने ऐसा बोला तो आपने पैलेस्टाइन का एग्ज़ाम्पल दिया, कश्मीर का एग्ज़ाम्पल दिया। बट, इज़न्ट इट अबाउट मोर लैंड एंड रिलिज़न?
एंड मैंने आपके वीडियोज़ भी सुने हैं। उसमें आपने बोला है कि जो महाभारत युद्ध हुआ है, पांडव ने पूछा, पाँच विलेजेस के लिए। तो वो लैंड के लिए है न जो वॉर हुआ है, लैंड के लिए, रिलिज़न के लिए?
आचार्य प्रशांत: उसको 'धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे' क्यों बोला श्रीकृष्ण ने? अगर ज़मीन के लिए लड़ाई थी तो उसको धर्म युद्ध क्यों बोला? और अगर सिर्फ़ ज़मीन की लड़ाई थी तो उसमें इतना बड़ा धर्मग्रंथ फिर कैसे खड़ा हो गया, भगवद्गीता?




