प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, स्वभाव क्या है?
आचार्य प्रशांत: क्यों पूछ रहे हो? क्योंकि जानना चाहते हो। नहीं जानोगे तो कैसा लगेगा?
प्र: अधूरा।
आचार्य: तो क्या स्वभाव हुआ तुम्हारा?
प्र: पूरा।
आचार्य: और जानना। तो, बोध स्वभाव है, और पूर्णता स्वभाव है।
कुछ बोला मैंने और समझ गए, तब कैसा लगता है? बोला मैंने और नहीं समझ पाए, तब कैसा लगता है?
तो क्या स्वभाव है? ‘स्वभाव’ मतलब – वो जो बिना किसी के बताए, पढ़ाए, संस्कारित किए, तुम हो।




