आप कहते हैं, “मुझे अपने काम से गिल्ट होता है,” लेकिन साथ ही अपने पुराने चुनावों को भी अटल सच मानकर पकड़े रहते हैं। फिर समाधान कैसे मिलेगा? ज़िंदगी तब बदलती है जब आदमी अपने अतीत, डिग्री, नौकरी और सुरक्षित पहचान को भी चुनौती देने का साहस करे। वरना हम बस दर्द कम करने की गोली माँगते रहते हैं, जबकि भीतर पूरा जीवन बदलने की पुकार चल रही होती है।
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प्रश्नकर्ता: मेरा सवाल ये है कि मैंने, मतलब, मैं आपसे सीखी हूँ कि काम का मतलब क्या है? काम जो हमें उठाए। तो पहले मुझे क्लैरिटी नहीं थी। मतलब, मेरा जो बैकग्राउंड है फ़ूड टेक्नोलॉजी से है, मैं बीटेक और एमटेक कर चुकी हूँ। तो आपके वजह से मैंने सीखा है कि डेयरी और मीट जैसी इंडस्ट्री में नहीं काम करना है। तो वैसे मैंने फ़िल्टर लगाती गई और मैंने वो वाली कंपनी जॉइन भी नहीं की, चाहे वो अल्कोहल हो या फिर बेवरेजेज़ हों।
तो अभी मैं जिस कंपनी में हूँ, मेरी वो कंपनी सॉसेज़ और ग्रेवीज़ हैं, तो वो बनाती है वो वेज में भी जाता है, बट जो मैं उसके कस्टमर्स देखती हूँ तो उसका जो एप्लीकेशन है वो नॉनवेज में ज़्यादा जाता है। तो मुझे बहुत ज़्यादा गिल्ट भी आता है। और दूसरी बात है कि ठीक है मैंने कर दिया है काम और उससे ऊपर उठने के लिए मैं दूसरे एग्ज़ाम भी देती हूँ। मैं फ़ूड टेक में रिलेटेड, या फिर उसको एक्सप्लोर करती हूँ कि इससे कुछ बेहतर मुझे मिले।




