प्रश्नकर्ता: आपके साइन (हस्ताक्षर) देखें। आप बिल्कुल सरल तरीके से अपना नाम ही हिंदी में लिख देते हैं। तो आप ऐसे साइन क्यों करते हैं?
आचार्य प्रशांत: आपत्ती क्या है? कुछ उसमें गलत दिख रहा है क्या? दो बातें तुमने कहीं। पहली कि सीधे-सीधे अपना नाम लिख देते हैं और दूसरा यह कि हिंदी में लिखते हैं। तो इन दोनों ही बातों में गलत क्या दिख रहा है?
मेरे ख्याल से बारह या चौदह की उम्र तक मैं भी अंग्रेज़ी में ही हस्ताक्षर करता था। वह भी थोड़ा घुमा करके। ऐसे पी बनाया घुमाकर आर बनाया। फिर सवाल पूछा कि यह ज़रूरत क्या है ऐसे घुमाने की, कोई नियम तो है नहीं। और ज़रूरत क्या है अंग्रेज़ी भाषा में ऐसा करने की? क्योंकि, हिंदी मेरे ज़्यादा निकट रही है। तो मेरा यह सवाल पूछना बिल्कुल जायज़ ही था कि बातचीत हिंदी में करता हूँ, खेलता हिंदी में हूँ, खाता हिंदी में हूँ, सुनता हिंदी हूँ, देखता हिंदी हूँ, हूँ हिंदी। तो जब हस्ताक्षर करने का, साइन (हस्ताक्षर) करने का समय आता है तो यह अंग्रेज़ी कहाँ से आ गई। तो मैंने अपने साइन बदल दिए और चुपचाप हिंदी में अपना नाम लिखने लग गया।
मैं समझता हूँ यह सवाल हम सबको पूछना चाहिए अपने-आपसे कि यह मान भी लें कि भाषा भाषा एक बराबर होती हैं, तो आप अंग्रेजी को क्यों प्रधानता दे रहे हैं हिंदी के ऊपर, कोई वज़ह है आपके पास? मैं हिंदी भाषियों से बात कर रहा हूँ अभी। मैं उनसे नहीं बात कर रहा हूँ जो दूसरी भाषाओं के हैं। मैं सबसे कह रहा हूँ जो जिस भाषा का है उसको क्या वज़ह मिल जाती है कि वह अंग्रेज़ी में दस्तख़त करना शुरू कर देता है। आप उड़िया हों, बंगाली हों, पंजाबी हों, तमिल हों मैं आप सबसे पूछ रहा हूँ। कौन सी मजबूरी आ गई कि आपको अपना नाम या अपना प्रतीक, अपना हस्ताक्षर अंग्रेज़ी में बनाना पड़ गया? मुझसे मत पूछो मैं हिंदी में क्यों करता हूँ, तुम बताओ तुम अंग्रेज़ी में क्यों करते हो? क्योंकि जब पैदा हुए थे तुम तो अंग्रेज़ी में तो लोरियाँ नहीं सुनी होंगी। हिंदी भाषी हो अगर तो घर में अंग्रेज़ी में तो नहीं बात करते होगे। माँ से जाकर दाल चावल ही माँगते होगे, राइस एंड करी एंड लेंटिल्स




