कितनी बार सोचा कि ये रील आख़िरी होगी, बस यहीं पर रुक जाना है, और रात के 3:00 बज गए, 4:00 बज गए। क्या करोगे आप बहुत स्क्रॉलिंग करके, या टीवी, या एक-एक घंटा नहाकर, या दो-दो घंटा खाकर? कुछ नहीं है, बैठे हुए हैं; ऐसे ही, ऐसे ही, ऐसे ही — ‘हाँ भाई, दो चाय और ले आओ।’ जब पता चल गया है कि क्या सही है, तब अपने आप को उसको सौंपना पड़ेगा, शत-प्रतिशत। ये आर्किमिडीज़ जैसी हालत है कि कपड़े पहनना भूल गए; दिनभर काम में डूबे रहे, वापस गए, बस चित्त पड़ गए। पर चूँकि वो चीज़ एक कीमत माँगती है, तो वो 1% लोगों को ही मिलती है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा नाम रेनुका है। मैं आर.एम.एल. में ऐज़ अ डॉक्टर कार्यरत हूँ। मैं चैप्टर 53 कोट करना चाहूँगी। उसमें हेडिंग है, इमर्स्ड ऑर लॉस्ट।
तो बहुत बार हमारे साथ ऐसा होता है कि हमारी ऐट-स्ट्रेच कंटिन्यूएशन में 24 आवर, 36 आवर, 72 आवर्स ड्यूटीज़ होती हैं। और जब ड्यूटीज़ ख़त्म होती हैं, उसके बाद बहुत बार प्रैक्टिकल एग्ज़ाम्स भी होते हैं।
तो इस बीच चीज़ें छूट जाती हैं, जैसे खाने-पीने का, या नहाने का, या घर पर बात करने का। वो टाइम नहीं निकल पाता। तो ये क्वेश्चन बहुत बार घरवालों की तरफ़ से आता है। या कभी वो फेस से, जब हम बाहर आते हैं, तो हमारी तरफ़ से ये क्वेश्चन आता है। और घरवालों की तरफ़ से स्पेशली आता है, आर यू लॉस्ट? तो मैं इसमें और जानना चाहूँगी, “इमर्स्ड ऑर लॉस्ट।”




