✨ A special gift on the auspicious occasion of Sant Ravidas Jayanti ✨
Articles
शरीर की औक़ात || नीम लड्डू
Author Acharya Prashant
Acharya Prashant
1 min
47 reads

चेतना ना बचे उसके बाद देह का हश्र भी देखा है? दो दिन पुराना मुर्दा भी देखा है, कैसा हो जाता है? यह है इस देह की औक़ात। बड़ी सुंदरता निखारते फिरते हो! यह जितने प्रेमी घूम रहे हैं, देह के, यह पास आने से घबराएँगे।

मर जाओगे उसके ४ घण्टे बाद कोई पास नहीं बैठना चाहेगा। बदबू उठती है, सड़ने लगते हो तो बर्फ़ पर रख दिए जाते हो। ज़्यादा देर तक फूँके नहीं गए तो तुम्हारी वजह से बीमारी फैल जाएगी। यह देह की औक़ात है, कीड़े पड़ जाएँगे; और चमकाओ!

मैं गंदा रहने को नहीं कह रहा हूँ, मैं पूछ रहा हूँ बस, कि जीवन का जितना अंश अपनी ऊर्जा, अपने समय, अपने संसाधनों का जितना बड़ा हिस्सा इसकी (देह) देखभाल में बिता रहे हो, क्या वह हिस्सा इस पर जाना चाहिए था? या जीवन का कोई और ऊँचा उद्देश्य होना चाहिए, जिसकी तरफ़ तुम्हारा समय जाए, संसाधन जाएँ?

Have you benefited from Acharya Prashant's teachings?
Only through your contribution will this mission move forward.
Donate to spread the light
View All Articles