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सरलता क्या है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
Author Acharya Prashant
Acharya Prashant
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वक्ता : आलोक का सवाल है कि सरलता क्या है ?

सरलता का अर्थ होता है- जो है सो है, सीधी-सीधी बात, जो कहा जा रहा है, सो कहा जा रहा है, जो सुना जा रहा है सो सुना जा रहा है। जटिलता होती है मन की ग्रंथियां और जब अगर कोई इन ग्रंथियों से मुक्त है तो इसी का नाम है सरलता।

याद रखना कि सरलता का अर्थ बिलकुल भी ये नहीं है कि तुमने कपड़े कैसे पहन रखे हैं, तुम कैसी भाषा में बात कर रहे हो– इन सब को सरलता के लक्षण मत समझ लेना। ये सब बाहरी बातें हैं। ये सब आचरण की बातें हैं, ये सब मूल नहीं। बात समझ में आ रही है? कोई कम खाता है, कोई कम खर्च करता है, तुम इसको सरलता मत समझ लेना।

सरलता का अर्थ होता है एक सरल चित्त। एक मन जो भटका हुआ नहीं रहता, एक मन जो जैसे को तैसा ही देखे । समझ रहे हो बात को? एक मन जो धारणाओं में नहीं रहता। एक मन जो धारणाओं में नहीं रहता वो है सरल चित्त।

एक सरल चित्त वो होगा जो मुझे सुन रहा है मेरी डिग्री को नहीं। जिसको जो स्पष्ट है, सामने है, वो दिखाई दे रहा है। सरलता का अर्थ होता है जीवन को पूरी तरह जीना। जीवन के लगातार संपर्क में रहना। सरलता का अर्थ है अपने ऊपर बेड़ियाँ न लगाना, बंधन न बना के रखना।

किसी छोटे बच्चे को देखा है? जब मन होता है ,नाच देता है। और तुम्हारा मन रखने के लिए वो कभी नहीं नाचेगा, कभी नहीं लेकिन ज्यादा करोगे तो थप्पड़ और मार देगा। ये सरलता है। साफ़ मन, निर्दोष, उस पर धब्बे नहीं लगे हुए हैं। हाँ, छोटे बच्चे की जो सरलता होती है वो इसीलिए होती है कि उसमे अभी गंदगी लगी नहीं है। तुम में अब जो सरलता आएगी वो ऐसे आएगी कि तुमने अब गंदगी को साफ़ कर दिया है।

तो तुम्हारी निर्दोषता, तुम्हारी सरलता, अब समझ के फलस्वरूप आएगी। बच्चा सरल अभी इसीलिए है कि जीवन ने अभी उस पर धब्बे नहीं डाले। तुम सरल अब ऐसे होगे कि तुम्हें अब इन धब्बों को साफ़ करना होगा।

और तुम्हारी सरलता, बच्चे की सरलता से बहुत आगे की सरलता होगी क्योंकि उसमे समझ भी होगी साथ में। बच्चे की सरलता में अभी समझ नहीं होगी। तुम्हारी सरलता में समझ भी होगी।

*‘ संवाद ’* *पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त* हैं।

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