ये कौन-सी बड़ी बात हो गई कि किसी पुरुष को स्त्रियाँ अच्छी लगतीं हैं, किसी को स्त्रियाँ अच्छी नहीं लगतीं? तुम्हें स्त्रियाँ नहीं अच्छी लगतीं तो तुम्हें कुछ और अच्छा लगता होगा। तुम किधर की ओर भी खिंच रहे हो, तुम सत्य की ओर तो नहीं खिंच रहे न? जो कुछ भी तुम्हें खींच रहा है, वो झूठ ही है। लोगों को बड़ी दिक़्क़त होती है, समलैंगिक लोगों से। और वो दिक़्क़त उन्हें क्यों होती है? क्योंकि वो चाहते हैं कि स्त्री है तो पुरुष की ओर जाये और पुरुष है तो स्त्री की ओर जाये।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा एक व्यक्तिगत सवाल है। मेरे घर में लगभग प्रतिदिन कोई-न-कोई मुद्दा होता है जो मेरी सेक्सुअलिटी (कामुकता) पर रिवॉल्व (घूमना) होता है कि आई डोंट गेट अट्रैक्टेड टू वूमेन (मैं महिलाओं के प्रति आकर्षित नहीं हूँ), ऐसा एक माहौल है घर में। तो घर वाले चाहते भी हैं कि मेरे को शादी करना है और मैं उसके अगेंस्ट(खिलाफ़) हूँ। तो ये घर में बहुत दिनों से इसपर एक युद्ध जैसा चल रहा है कि क्या हो। तो इसके लिए मैं क्या करूॅं?
आचार्य प्रशांत: दो गंजेड़ी थे, एक खम्भे पर चढ़ गया, एक गड्ढे में गिर गया। जो गड्ढे में गिर गया वो खम्भे पर चढ़नेवाले से कम नशे में था? तो कुछ होते हैं जो स्त्रियों की ओर आकर्षित होते हैं, वो गड्ढों में गिरे होते हैं। कुछ होते हैं जो स्त्रियों की ओर नहीं आकर्षित होते हैं, वो खम्भों पर चढ़े होते हैं।
जो खम्भे पर चढ़ा है, गॉंजा तो उसने भी उतना ही चढ़ा रखा है न जितना गड्ढे में गिरनेवाले ने? बात ये है कि तुम गड्ढे में गिर रहे हो या खम्भे पर चढ़े हुए हो या बात ये है कि नशा नहीं होना चाहिए? गड्ढा, खम्भा एक हैं। दोनों नशे के प्रतिनिधि हैं।




