सही और गलत उधार की बातें हैं। जो बात एक देश में सही है, वो दूसरे में गलत मानी जाती है। जो आज सही है, वो कल गलत था। दो सौ साल पहले भारत में माना जाता था कि पति की मृत्यु पर पत्नी आत्मदाह करें — तब ये सही था। आज कोई इसे स्वीकार नहीं करेगा। तुम भूल जाते हो कि सही-गलत तुम्हें किसी और ने सिखाया है, और उन्हें भी किसी और ने। असली सही यह है कि तुम अपनी समझ और होश से जियो। बेहोशी में किया हर काम गलत है। सही और गलत क्या है, इसके लिए तुम्हारी विवेक-दृष्टि ही काफ़ी है।
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प्रश्नकर्ता: सर, आपने कहा कि बाहरी ताकतों के इशारों पर मत नाचो, अपनी समझ के अनुसार चलो। पर अगर अपनी समझ के अनुसार चलूँ तो क्या प्रमाण है इस बात का कि जो होगा वो सही ही होगा? मैं कैसे जानूँ कि अगर मैं अपनी समझ से काम कर रहा हूँ तो मैं सही हूँ? कैसे पता?
आचार्य प्रशांत: तुम्हें अभी कैसे पता है कि जो हो रहा है वो ठीक है? तुम्हें अभी सही और गलत का कैसे पता है? अभी तुम्हें सही और गलत का बस इतना ही पता है कि किसी और ने तुम्हें सिखा दिया है कि क्या सही है और क्या गलत और तुमने मान लिया है कि अगर ऐसा हो जाए तो सही होता है, और ऐसा हो जाए तो गलत होता है। अब ये तो बड़ी गहरी बीमारी हो गई कि सही और गलत भी वही है जो किसी और ने बता दिया। हमारे सही और गलत भी हमारे नहीं हैं, आयातित हैं। और अलग-अलग लोगों के सही और गलत उनके अपने दृष्टिकोण हैं।
तुमने ये कैसे मान लिया कि वो सही और गलत जो तुम्हें सिखाए गए हैं वो सही ही हैं? तुम्हें सिखाया गया कि सफ़लता सही है और असफ़लता गलत है। तुम्हें सिखाया गया है कि इस प्रकार की नैतिकता सही है और उस प्रकार की अनैतिकता गलत है। तुम्हें कैसे पता कि सही और गलत जैसा कुछ होता भी है? क्या तुम ये नहीं जानते हो कि जो बात एक देश में सही है वो दूसरे देश में गलत है? क्या तुम नहीं जानते कि एक ही जगह पर जो आज सही है वो कल गलत था? क्या तुम ये नहीं जानते हो कि एक धर्म में जो बात सही है वो दूसरे धर्म में गलत है? एक घर में जो सही है दूसरे घर में वो गलत है, क्या तुम ये नहीं जानते?




