आचार्य प्रशांत: सच इतना डरा हुआ क्यों है? सच इतना डरा हुआ इसलिए है, क्योंकि घपला कर बैठा है। “लागा चुनरी में दाग़ छुपाऊँ कैसे”।
किसी को जब मारना होता है तो आमतौर पर उसको मारने के लिए शुद्ध ज़हर का इस्तेमाल नहीं किया जाता। काला, दहकता, गरल हो विष, कड़वा, और शायद दुर्गन्धयुक्त भी, उसका इस्तेमाल करके आप किसी को मार ही नहीं पाएँगे; झूठ वैसा होता है। झूठ शुद्ध ज़हर जैसा होता है, वो इतना ज़्यादा घिनौना होता है और उससे इतनी आपको जुगुप्सा जगेगी कि आप हाथ हटाकर उसे दूर कर देंगे।
तो इसीलिए झूठ, शुद्ध झूठ बहुत नुक़सानदेह हो ही नहीं सकता। वो आपके सामने लाया जाएगा, आप तुरन्त उसको अस्वीकार कर देंगे। उसका घिनौना, बर्बर और गर्हित रूप देखकर ही आप समझ जाएँगे कि ये चीज़ बड़ी गड़बड़ है। इसीलिए दुनिया में कभी आपको शुद्ध झूठ दिखाई नहीं देगा। ठीक वैसे ही जैसे कि शुद्ध ज़हर कौन इस्तेमाल करता है! किसी को जब हानि करनी होती है किसी की, तो वो उसको दूध में या शरबत में या अच्छे, बढ़िया, स्वादिष्ट, सुगन्धित भोजन में ज़हर की एक-आध बूँद मिलाकर देता है। अब ज़हर बहुत ज़बरदस्त रूप से घातक हो गया!
समझ रहे हैं?
तो झूठ में कोई ताक़त नहीं है जब तक उसको सच न मिल जाए। और सच जैसे ही सौ से घटकर निन्यानवे प्रतिशत हुआ, वो अति घातक ज़हर बन जाता है! सच में आप थोड़ा सा झूठ मिला दीजिए, दूध में आप थोड़ा सा ज़हर मिला दीजिए, अब वो ज़बरदस्त रूप से घातक हो गया, और वही घातक है! शुद्ध ज़हर घातक नहीं था। व्यावाहारिक रूप से, किताबी मत करिए कि शुद्ध ज़हर भी तो कोई लेगा तो मर जाएगा। शुद्ध ज़हर कोई लेगा ही क्यों? शुद्ध ज़हर चीज़ ऐसी है कि उसे कोई लेगा ही नहीं। तो ज़हर को बस एक प्रतिशत होना पड़ता है निन्यानवे प्रतिशत दूध को या शरबत को भी अति घातक ज़हर बना देने के लिए।




