सच्चाई के लिए जब प्रेम होता है, सफाई के लिए जब प्रेम होता है तो आदमी फिर गंदगी के तथ्य को नकारता नहीं है वो कहता है हम देख पा रहे हैं कि बहुत गंदगी है। साफ करेंगे। बच्चे हों या बड़े हों सबको समझाना पड़ेगा कि विविधता एक बात होती है विविधता को विषमता मत बनाओ। दो अलग हैं इसका मतलब ये नहीं है कि उनमें से एक श्रेष्ठ है, एक हीन है। और अगर कुछ श्रेष्ठ कुछ हीन तुम्हें लग भी रहा है तो पहले देखो कि क्यों लग रहा है? श्रेष्ठता और हीनता का आधार बता दो?
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, हर कंट्री हर कॉन्टिनेंट ज्यादा से ज्यादा पावरफुल होना चाहता है और ये भी उनका एक अहम है कि हम इनसे आगे निकलना चाहते हैं। और मैं देख पा रही हूँ कि हर जगह पर हमें विषमता दिखती है। हम फिर कहीं ना कहीं मुझे ऐसा होता है कि हम क्या कर सकते हैं? कि हम एक साथ आके रह सके जैसे कि हम बोलते हैं वसुधैव कुटुम्बकम। तो कहीं पर मैं बेबी एडप्शन की भी बात करती हूँ, तो उनको एकदम अलग ही चीजें लगती है ये सब के ऐसा अपना बच्चा अपना होता है।
एनिमल्स की बात करती हूँ तो भी उनको एकदम अलग लगता है, कि ये सारा अहम अगर हम सब में है तो हम कहाँ जा के अटकेंगे? क्योंकि कहीं ना कहीं ऐसा भी लगता है कि दुनिया का अंत भी आ रहा है। क्या हम कभी भी वसुधैव कुटुम्बकम ये कांसेप्ट को, ये कांसेप्ट तो नहीं है ये करुणा है। ये स्वीकार कर पाएँगे? और अगर कुछ भी है जो हम हमारे साइड से कर सके तो वो क्या हो सकता है? क्योंकि ये सब सोच के फिर बहुत दुख होता है ऐसा लगता है कि आई एम हेल्पलेस। तो क्या करना चाहिए ऐसे सिनेरियो में?
आचार्य प्रशांत:




