राष्ट्रों की लड़ाई असल में अहंकार की लड़ाई है। देश माने वहाँ के लोग, और लोग जैसे हैं वैसे ही उनके नेता। दुनिया में जो गुंडागर्दी दिखती है वो बाहर से नहीं आई, हम ही उसका स्रोत हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध हों या व्यक्तिगत, यहाँ वफ़ा नहीं ताक़त चलती है। अहंकार की भूख अनंत है इसलिए युद्ध रुकता नहीं। समाधान केवल एक है कि जनसंख्या को स्वयं की शिक्षा मिले। जब तक इंसान अपने अहंकार को नहीं पहचानेगा तब तक विनाश जारी रहेगा।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ईरान के बारे में ही, तो दुनिया में आजकल माहौल ऐसा है कि बिल्कुल खुलेआम गुंडागर्दी चल रही है। आप किसी के प्रेसिडेंट को उठवा ले रहे हो। आप किसी के कंट्री हेड को मिसाइल से मार दे रहे हो। आपकी अगर कोई बात नहीं सुनता तो आप टैरिफ की धमकी देते हो और इकोनॉमी उनकी बर्बाद करने की धमकी देकर उन पर चढ़ना चाहते हो। तो एक तरह से आप कह रहे हो कि हमारी बात सुनो, नहीं तो उड़ा देंगे, इकोनॉमी ख़त्म कर देंगे या फिर आपको ख़त्म कर देंगे।
तो इस बीच हर देश घबराया हुआ है, किसी को पता ही नहीं कि इस सिचुएशन को नेविगेट कैसे करें। तो ऐसी सिचुएशन में इंडिया या बाक़ी कंट्रीज़ का स्टैंड कैसा होना चाहिए, सर?
आचार्य प्रशांत: कंट्री का कोई स्टैंड क्या होगा भाई, कंट्री माने क्या होता है? इमारतें, सड़कें? आप कंट्री हैं, मैं कंट्री हूँ, ये सब लोग कंट्री




