प्रश्नकर्ता: मेरा प्रश्न थोड़ा कुतार्किक लगेगा, पर मुझे पूछना था। होता यह है कि अभी आप देखोगे हर तरफ़ क्या होता है कि हम आज का पेपर भी पढ़ेंगे, न्यूज़ चैनल हो या फिर कोई अदर (दूसरा) चैनल; तो ज्योतिष का बहुत चलता रहता है उसमें। तो मेरा थोड़ा सा इन्क्वायरी (जाँच-पड़ताल) वाला नेचर (स्वभाव) था तो मैं थोड़ा सा उसके बारे में फिर पढ़ने लग गया और फिर बहुत अन्दर घुस गया।
तो मैंने ऐसा समझ लो कि थोड़ा सीख ही लिया ज्योतिष। तो वो अभी भी मेरे ज़ेहन में है। जब से मैंने आपको सुनना चालू किया नौ महीने से, मैंने पूरा ज्योतिष जो है वो न मैं देखता हूँ न मेरी उससे अटैचमेंट (लगाव) है। मेरे सामने भी आता है तो मेरा उससे कोई लेना-देना नहीं, क्योंकि मैंने जान लिया कि वो मेरी चेतना को तो सम्बोधित नहीं करता है।
और दूसरी बात कि वो भी एक तरह से फिज़िकल (भौतिक) है। फिर मुझे पता चला कि जो वाह्य जगत की चीज़ें हैं वो अगर मेरे ऊपर काम करती भी होंगी तो वो वाह्य ही हैं। उससे कुछ चेतना के बारे में कुछ नहीं बोलते हैं वो। जैसे कि आपकी स्थिति अच्छी रहेगी, संतान होगी, शिक्षण में बाधा आएगी। ऐसी-ऐसी चीज़ें वो करते रहते हैं। तो वो तो वैसे हम प्रेडिक्ट (भविष्यवाणी) कर सकते हैं।
अभी मेरा प्रश्न यह है कि वो जो मेरे दोस्त थे, मैंने आपके वीडियोस उनको फॉरवर्ड किये, दूसरे भी कुछ तर्क दिये। तो वो उससे नहीं निकल पा रहे जबकि मैं उनको उसमें लाया था। और दूसरी तरफ़ देखता हूँ कि सब तरफ़ तो वही चल रहा है। मेरी मम्मी भी सवेरे देखती हैं और उसको अभी कॉन्ट्राडिक्ट (खंडन)...
बहुत बार मैंने देखा है कि बहुत सारे लोग क्या करते हैं कि ये वर्क (काम) ही नहीं होता है या फिर ये चलता ही नहीं है, आपके मन में भ्रम है। तो इसको मतलब, क्योंकि ये बहुत बड़ा एक




