रातों को नींद न आना, और अन्य बेचैन सवाल || आचार्य प्रशांत (2020)

प्रश्नकर्ता: आज हमारे साथ मौजूद है एक ऐसी सख्सियत जिन्हें हम गुरु, हमारे टीचर, एनवायरनमैंटल ऐक्टिविस्ट (पर्यावरण कार्यकर्ता), सोशल ऐक्टिविस्ट (सामाजिक कार्यकर्ता), स्पिरिचुअल टीचर (आध्यात्मिक गुरु); इन सभी के नाम से जान सकते हैं। मुलाकात करते हैं आचार्य प्रशांत जी से।
आचार्य प्रशांत जी आपका बहुत बहुत स्वागत है। सर, आपने आइआइटी से पढ़ाई करी, आपने आइआइएम से पढ़ाई करी, आप सिविल सर्वंट (जनसेवक) भी रहे हैं, तो अध्यात्म की तरफ़ आपका रुख कैसे हुआ?
आचार्य प्रशांत: देखिए वो सब तो जीवन की, दुनियादारी की बातें हैं, चलती रहती हैं। और जब आप अच्छी संस्थाओं से जुड़े होते हैं वहाँ पढ़ाई करी होती है तो दुनिया को आप और बेहतर तरीके से जान पाते हैं। अध्यात्म दुनिया से हटकर के कोई चीज़ है नहीं। दुनिया को ही समझकर दुनिया में सही जीवन जीने की बात है।
तो जितना अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव हुआ है, जितना सांसारिक ज्ञान हुआ, उतना ज़्यादा समझ में आता है फिर कि इस वक्त दुनिया में कौनसा काम है जो करने लायक है, कैसे जीना चाहिए। किसको हम मन कहते हैं, जिसको जीवन कहते हैं, पूरा ये ज़िन्दगी का, दुनियादारी का खेल; ये और ज़्यादा साफ़ समझ में आता है फिर।
इसी को अध्यात्म कहते हैं।
प्र: आपको किस नाम से बुलाया जाए? गुरु बोलें, आचार्य बोलें, स्पिरिचुअल टीचर बोलें, एनवायरनमैंटल ऐक्टिविस्ट



