प्रश्नकर्ता: नैतिकता पर मेरा एक प्रश्न है। मैं पाँच सालों से शाकाहारी हूँ और पिछले दो सालों से वीगन। मैं महिलाओं के साथ डेट पर जाता था, जिनसे मैं डेटिंग ऐप पर मिला था। भले ही मैं पशु उत्पादों को नहीं खाता था, लेकिन वो खातीं थी तो मैं उसका भुगतान करता था और मैं उन्हें कहता था कि ये तुम्हारी ज़िन्दगी है, तुम जो चाहो वो करो, ये तुम्हारा निजी फैसला है।
और मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैं उम्मीद कर रहा था कि मैं उनके साथ सो पाऊँगा, और यदि मैंने कहा कि नहीं तुम एक पशु हत्यारे हो, मैं इसके लिए भुगतान नहीं करने वाला, तो वो उस पूरे माहौल को ख़राब कर देता और मैंने हमेशा इसके लिए ख़ुद को दोषी महसूस किया है।
जैसा कि आपने कहा, आपने जो किया उसमें मैं कभी भी सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाया। इसी तरह, मैं कभी भी ये देख नहीं पाया कि मैंने सचमुच एक निर्दोष, मासूम प्राणी को मारने के लिए भुगतान किया, जिसने मुझे कभी नुकसान नहीं पहुँचाया, वो सिर्फ़ इसलिए मारा गया ताकि मैं शारीरिक सुख ले सकूँ। यह मेरे प्रश्न का पहला भाग है।
और दूसरा भाग यह है कि ऐसे कई मौके आते हैं, जब मैं सही काम करना चाहता हूँ मगर मुझे डर लगता है कि कहीं उसके कारण मैं अकेला न रहा जाऊँ, यदि मैंने माँस-भक्षण का विरोध किया तो। मेरे कुछ दोस्त हैं जो मुझे सलाह देते हैं कि माँस खाने वाले व्यक्ति के साथ संबंध रखने में कोई बुराई नहीं है।
वो ऐसा करते हैं, मगर मैं ऐसा नहीं करता। मैं इसलिए उन्हें जज करता हूँ कि वो कैसे किसी के दुष्कर्मों को बढ़ावा दे रहे हैं और अगर तुम माँस नहीं खाते तो तुम क्यों ऐसे इंसान का पालन-पोषण करके माँस-भक्षण का समर्थन कर रहे हो?
आचार्य प्रशांत: देखिए, जो, जो इंसान




