हम अपने आप को बहाना दिए रहते हैं कि अगर मेरे जीवन में प्रेम नहीं है, तो इसलिए नहीं है क्योंकि कठिन है। संगति ऐसों की करिए, जिनकी ज़िंदगी में प्रेम हो, वो आपसे आपके बहाने छीन लेंगे। संगति इसीलिए बहुत बड़ी चीज़ होती है। सौ लोग मिलकर जो सिद्ध कर रहे हैं कि प्रेम असंभव है, इन सौ लोगों की बात को एक दूसरा उदाहरण, एक विपरीत उदाहरण काट सकता है, उसकी खोज करनी चाहिए। और ये सौ उस एक से बहुत घबराएँगे, क्योंकि एक करोड़ लोगों के झूठ को एक आदमी का सच काट सकता है।
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प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। कुल जमा कर सारा निचोड़ यही है कि अपने आप को हठी कैसे बनाएँ? जिद्दी कैसे बनाएँ? क्योंकि हम वहीं हार जाते हैं, प्रतिदिन, हर पल जो आसान होता है, उसी का चयन कर लेते हैं।
आचार्य प्रशांत: तो उस ज़िद को प्रेम भी कहते हैं, है न।
प्रश्नकर्ता: आसानी से होता नहीं है।
आचार्य प्रशांत: याद नहीं आता कई बार, इसीलिए फिर सही संगति चाहिए होती है। जैसे आमतौर पर भी, बिल्कुल ये ज़मीनी तल का उदाहरण है। हम कह रहे हैं कि जब ज़मीनी तल पर भी ये होता है, तो सोचो थोड़ा ऊपर कितना होता होगा। आमतौर पर भी, जैसे यहाँ लोग खड़े हैं, बहुत सारे जवान लोग हैं। ये वैसे भले ही मान लीजिए, ये सिंगल हैं, इनके पास कोई जोड़ीदार नहीं है। तो ये वैसे भले ही मौज में घूमते रहें, पर किसी ऐसी जगह पहुँच जाएँ जहाँ सब कपल्स हों, जोड़े ही जोड़े हों। तब इनको उठेगा कि “मैं ऐसा क्यों हूँ?” नहीं उठना चाहिए, पर उठेगा, “मेरे साथ कौन है?”




