प्रश्नकर्ता: पिछले कुछ दिन से एक सेक्सुअल थॉट (यौन विचार) मन पर छाया रहता है। पॉर्न (अश्लील सामग्री) भी देखने लगा हूँ। जब अध्यात्म से नहीं जुड़ा था, तब भी मन इतना नहीं भागता था उन बातों की तरफ़; अभी एकदम से बहुत ज़्यादा हो गया है। पहले मुझे लगता था कि जब मैं खाली होता हूँ तो ये चीज़ें हावी होती हैं, पर अभी मैंने देखा कि जब मैं कुछ कर रहा होता हूँ तो भी ऐसे बैकग्राउंड (पृष्ठभूमि) में चल रहा होता है वो। जैसे उसको मौक़ा मिला और वो चीज़ आगे आ जाती है।
आचार्य प्रशांत: तो कैसा होता है एक पॉर्न का वेबपेज? थोड़ा खुलकर बताओ।
प्र: उत्तेजित करने वाला।
आचार्य: उत्तेजित करने वाला। और क्या होता है? उसपर एक वीडियो आ रहा होता है। और क्या होता है उस पेज पर? बस एक ही वीडियो होता है?
प्र: कई वीडियोज़ होते हैं।
आचार्य: कई होते हैं। यूट्यूब की तरह ही! जैसे यूट्यूब होता है, कि एक तो मुख्य वीडियो, जो देख रहे हो, और नीचे कतार बनी हुई है, और भी हैं। तो जब उस पेज पर पहुँच जाते हो तो एक ही वीडियो देखकर थम जाते हो या फिर झड़ी लगती है?







