अपने साथ जो चले — जानने वालों ने उसको बस एक नाम दिया है। बोले तुम्हारे साथ जो चले वो वो भी नहीं हो सकता जो तुम्हारे बगल में खड़ा हो। जो तुम्हारे साथ हमेशा चले वो सेल्फ होता है — तुम ही सिर्फ़ अपने साथ चल सकते हो। तुम्हारे अलावा कोई तुम्हारे साथ नहीं चल सकता।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा नाम सत्यम प्रकाश है और मैं आईआईटी दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा हूँ। अपने सब्जेक्ट के ऊपर आपके विचार जानना चाहूँगा। मैंने अपनी ग्रेजुएशन कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में की है और जब मैं अंतिम वर्ष में था तब मेरे को एक एमएनसी से जॉब रोल ऑफर हुआ था। ख़ैर वो जॉब रोल मैंने लिया नहीं।
उसमें मुझसे ये एक्सपेक्ट किया जा रहा था कि मैं एक सॉफ्टवेयर प्लेटफार्म पर काम करूँ जिससे हम कंज्यूमर का कंज़म्प्शन बढ़ा सकें। तो *जस्ट टू गिव एन एग्ज़ांम्पल हम लोग जैसे 10 मिनट्स फूड डिलीवरी ऐप देखते हैं जिसमें इंटरफेस इतना इजी बनाया जाता है कि आप जो चाह रहे हैं आप फटाफट उसको बाय(खरीदना) करें और वादा किया जाता है कि 10 मिनट में आपके तक माल पहुँच जाएगा तो इससे कंज़म्प्शन ही बढ़ रहा है — एक कस्टमर का।
तो ये जानते हुए मैंने वो जॉब रोल नहीं लिया और लगभग उसी समय मेरे को आईआईटी




