पढ़ाई के दबाव से टूटता छात्र || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा जो प्रश्न है वो हाल ही में मेरे साथ हुए एक इन्सिडेन्स (घटना) से है। मेरी एक भांजी है जो एग्जाम में फेल होने के कारण और स्ट्रेस के कारण वो आठ दिनों से घर से भाग गयी थी और आठ दिनों के बाद हमें वो मिली है। और इसके बाद जो मैंने समझा है — हम एक छोटे शहर से आते हैं और मैंने उसको समझा कि ये क्यों हुआ है। तो मुझे पता चला कि पैरेन्ट्स के दबाव में और उसको ऐसा लगा कि 'मेरा करियर अब आगे बढ़ नहीं सकता, और मैं करियर में कुछ कर नहीं सकती।' हालाँकि वो पॉलिटेक्निक के सेकंड-ईयर (द्वितीय-वर्ष) में ही है और वो पढ़ाई के साथ आर्ट (कला) में भी अच्छी थी, पर स्ट्रेस (तनाव) और डिप्रेशन (अवसाद) के कारण वो समझ नहीं पायी और वो निकल गयी।
फिर मुझे ऐसा लगा कि हम लोग जब छोटे शहर से आते हैं तो हमें एजुकेशन का मतलब भी पता नहीं। एज़ अ पैरेन्ट्स (अभिभावक के रूप में) और एज़ अ स्टूडेंट (छात्र के रूप में) हम उसे समझ भी नहीं पा रहे। हम पढ़ाई भी इसलिए कर रहे हैं कि हम एक जॉब (नौकरी) कर सकें और उसके द्वारा हम अच्छे से कंसम्पशन (उपभोग) कर सकें। तो आचार्य जी एज़ अ पैरेन्ट्स और एज़ अ स्टूडेंट आप उनका मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: देखो, पढ़ाई की बहुत धाराएँ उपलब्ध हैं। जो एक धारा में किसी भी तरीक़े से मन लगा न पा रहा हो, उसको प्रयोग करके किसी दूसरी धारा को चुनने दो न। और इस मामले में तो शिक्षा पिछले बीस-तीस सालों में बेहतर ही हुई है। पहले इतने तरह के विकल्प ही नहीं होते थे। सबसे जो बढ़िया वाले होते थे उनको कहा जाता था इंजीनियरिंग; जो थोड़े उनके आसपास के होते थे वो मेडिकल; थोड़ा सा और इधर वाले हैं वो कॉमर्स; बाक़ी बीएससी



