नींबू-मिर्च का टोटका, और झाड़-फूँक का विज्ञान || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। मेरा प्रश्न मन के ऊपर है, जिसे मैं तीन पॉइंट्स (बिंदुओं) में थोड़ा डिस्क्राइब (वर्णन) करना चाहूँगा। पहला है, झाड़-फूँक। दूसरा, नींबू-मिर्च या सिंदूर वगैरह का टोटका। तीसरा रहेगा, मेरे पैर का दर्द।
पहली बात, कुछ साल पहले मेरे घर में माहौल बहुत तनावपूर्ण था। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से हम लोग ठीक नहीं थे। फिर किसी के कहने पर हम लोग कहीं किसी बाबा के पास गए तो उन्होंने कुछ झाड़-फूँक वगैरह करा। और मैंने ये ऑब्ज़र्व (अवलोकन) करा कि उसके बाद मेरे घर का माहौल थोड़ा ठीक हो गया। क्या हुआ, मुझे अब तक समझ नहीं आया।
दूसरा है ये नींबू-मिर्च का टोटका जिसके बारे में हम बचपन से सुनते आए हैं, कि चौराहे पर नींबू-मिर्च या नींबू के ऊपर सिंदूर हो, या आपको कुछ लगता हो संदिग्ध सा, उसको न छुएँ, उससे दूर रहें।
मैं विज्ञान का छात्र रहा हूँ, तो मैं जब बड़ा हुआ तो मेरा इन सब पर ज़्यादा विश्वास नहीं था। लेकिन अभी भी जब मैं किसी चौराहे पर किसी ऐसी चीज़ को देखता हूँ तो भले ही मैंने कितना भी समझा लिया हो अपने मन को, ये फिर से वहीं पर आ जाता है। बैक टू स्क्वॉयर वन (जस का तस)। मतलब दोबारा से वो डर आ जाता है, ये इतना गहराई से बैठ गया है मुझमें।
तीसरा है, ये पैर का दर्द। मैं व्यायाम वगैरह करता हूँ, पार्क भी जाता हूँ। पार्क थोड़ा जंगल जैसा है। तो हुआ ये एक दिन कि दायें पैर के निचले हिस्से में दर्द शुरू हो गया। दर्द सहने लायक़ था तो मैंने सोचा कि नस इधर-उधर हो गयी होगी, अपनेआप ठीक हो जाएगा। लेकिन जब मैं सोने के लिए जाता तो ये बहुत दर्द करता और ऐसा पाँच-छः दिन चला। तब मुझे लगा कि शायद कुछ और ही बात है।



