आचार्य प्रशांत:
इसमें एक हिंट लिख दो। छोड़ना सिर्फ़ उन चीज़ों को ही नहीं है जो तुम्हें नुकसान देती हैं, छोड़ना उन चीज़ों को है जो पशुओं को नुकसान देती हैं।
आचार्य प्रशांत:
इसमें एक हिंट लिख दो। छोड़ना सिर्फ़ उन चीज़ों को ही नहीं है जो तुम्हें नुकसान देती हैं, छोड़ना उन चीज़ों को है जो पशुओं को नुकसान देती हैं।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक ही चीज़ का लम्बे समय तक सॉल्यूशन (हल) नहीं मिल पाता। जैसे मान लीजिए कि कोई मानसिक समस्या है, उसमें काफ़ी समय बीत गया और उस पर मनन-मंथन भी काफ़ी हुआ, लेकिन उससे उबर नहीं पाये हम, उससे…

प्रश्नकर्ता: दुनिया की इस आठ-अरब की आबादी में आत्मस्थ आदमी की पहचान कैसे हो?
आचार्य प्रशांत: तो गौरव, आत्मस्थ आदमी की पहचान तुम्हें करनी क्यों है? आत्मस्थ आदमी की पहचान तुम करना चाहते हो, इसका मतलब आत्मस्थ आदमी कुछ खास होता होगा! तुम ये तो कहते नहीं, कि “आठ-अरब की…

आचार्य प्रशांत: आपकी भाषा कितनी समृद्ध है इससे बहुत हद तक ये पता चलता है कि आप इंसान कितने समृद्ध हैं। आपकी भाषा कितनी ऊँची है इससे पता चलता है आप इंसान कितने ऊँचे हैं। आज की जो जवान पीढ़ी है, इसके पास शब्द ही नहीं हैं, इसकी पूरी वोकैबुलरी