आचार्य प्रशांत:
इसमें एक हिंट लिख दो। छोड़ना सिर्फ़ उन चीज़ों को ही नहीं है जो तुम्हें नुकसान देती हैं, छोड़ना उन चीज़ों को है जो पशुओं को नुकसान देती हैं।
आचार्य प्रशांत:
इसमें एक हिंट लिख दो। छोड़ना सिर्फ़ उन चीज़ों को ही नहीं है जो तुम्हें नुकसान देती हैं, छोड़ना उन चीज़ों को है जो पशुओं को नुकसान देती हैं।

प्रदूषण केवल जानकारी की कमी से नहीं, बल्कि गलत इरादों, सुविधा-प्रियता और गैर-जिम्मेदारी से पैदा होता है। लोग प्रदूषण के बारे में जानते हुए भी उसे बढ़ाते हैं क्योंकि ज्ञान अपने आप में पर्याप्त नहीं है। नदियों, हवा और पर्यावरण को सचमुच स्वच्छ बनाने के लिए पहले मन और नीयत को स्वच्छ करना आवश्यक है। बाहरी गंदगी अक्सर भीतर की अव्यवस्था और असंवेदनशीलता का ही विस्तार होती है।

फटी हुई जींस पहनने, और बाल रंगवाने से कोई कूल नहीं हो जाता। कूलनेस बहुत अच्छी चीज़ है, परंतु कूल हो नहीं, और ख़ुद को कूल कहो — यह समस्या है। कूल होना आध्यात्मिक बात है। कूल होने का असली मतलब है कि तुम श्रीकृष्ण का ज्ञान जानो। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा — तू विगत-ज्वर हो जा। जिसे ज्वर न चढ़े, जो आवेश और आवेग से मुक्त हो, वही वास्तव में कूल है।

सिविलाइजेशन की एक बड़ी पहचान होती है, 'रिस्पेक्ट फ़ॉर इंडिविजुअलिटी।' कोई पूछे, ‘सिविलाइजेशन, सभ्यता की परिभाषा क्या है?’ निजता का सम्मान बढ़ने लगता, जैसे-जैसे सभ्यता बढ़ती है। और अगर निजता का सम्मान नहीं बढ़ रहा है तो जान लो कि हम अभी बहुत असभ्य लोग हैं। पर्सनल स्पेस की कद्र करना सीखिए। शारीरिक तौर पर भी और मानसिक तौर पर भी। न किसी के शरीर पर चढ़िए, न किसी के मन पर चढ़िए।