मुद्दा फ़िल्मों के बॉयकॉट का || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। दो हज़ार चौदह-पंद्रह में एक मूवी निकली थी ‘पीके’। वो मूवी ने पाँच-सौ छह-सौ करोड़ रुपए कमाये और रिलीज्यस मेंटल पर ये मूवी है। तो उस मूवी में ऐसा बताया जाता है कि हिन्दू सेंटिमेंट्स को हर्ट किया गया है। उसमें कुछ ऐसा सीन है जहाँ पर आमीर खान शंकर भगवान को वौशरूम में लेकर चले गये। और उसको कोई मारने आ रहा है तो वो एक गाल पर फोटो दिखा रहा है तो वो रुक जा रहा है। फिर कहे तो रोड-साइड में ही इज़ पीइंग और उसके पास जो सूटकेस है उसपर भगवान के फोटो लगे हुए है। तो सेंटिमेंट्स हर्ट हो रहा है तो उसपर बहुत बवाल हुआ था।
लेकिन उसमें कुछ ऐसा भी दिखाई दिया कि जो धर्मगुरु होते हैं, वो लोग डरका धंधा करते हैं। तो वो लोगो को डराते हैं और उसके बाद लोग उनके पास जाते हैं कि हमको कुछ मिल जाएगा। तो वो धर्मगुरु बोल रहा है कि एक काम करो — तुम्हारी बीवी बीमार है, तीन हज़ार किलोमीटर जाओ, वहाँ एक मंदिर है उसमे जाओ। लेकिन उसमें ये भी चीज़ है कि उसमे हिन्दू कम्यूनिटी में जो फ़्लौस है, उसको टार्गेट किया। वो खुद मुस्लिम कम्यूनिटी को बिलांग करता है, उसको तो टार्गेट नहीं किया। सिर्फ़ वो मस्जिद के बाहर बीयर का बोतल लेकर भागा है। न ही क्रिश्चन कम्यूनिटी का उसमें कुछ बताया है। तो एज़ ए हिन्दू मुझे दिख रहा है कि वो कुछ फ़्लॉज़ है जो सही है। तो मेरे रीलीजन में उसको सही करूँ और उसने जो निगलेक्ट किया अपनी कम्यूनिटी का तो उसको इग्नोर कर दूँ या मैं डीफ़ेंसिव और अग्ग्रेसिव हो जाऊँ कि तू मेरे को क्यों गलत दिखा रहा है, तूने तो अपने आप को बचा लिया है। मुद्दा फ़िल्मों के बॉयकॉट का है। इस पूरे चीज़ को कैसे देखूँ? मेरा शास्त्र क्या कहना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: उनको जो दिखाना था, उन्होंने दिखाया। राम जाने उनकी मंशा क्या थी। आपने क्या दिखाया? उनको जो भी करना था, उन्होंने किया। आपने क्या किया? आप कह रहे हैं कि वह हिंदू-धर्म का विकृत रूप दिखा रहे हैं, लोगों को अनादर कर रहे हैं। आपने कितने लोगों को उपनिषद पढ़ा दिए? कितने लोगों को गीता पढ़ा दी? आपने शिवत्व का असली अर्थ कितने लोगों को समझा दिया? और जो समझ जाएगा, फिर उस पर किसी फ़िल्म का कोई असर पड़ेगा?



