हम सोचते हैं वर्तमान में होने का अर्थ है कि जो काम कर रहे हो उसमें हो जाओ। ये हो ही नहीं पाएगा। हम सोचते हैं वर्तमान में होने का अर्थ है कि इस वक़्त जो हो रहा है उसको अपना पूरा मन दे दो। ये हो ही नहीं पाएगा जब तक तुम अपनी उस जगह को उपलब्ध नहीं हो जाते जो वास्तव में है, जो वास्तव में प्रेज़ेंट (वर्तमान) है, जिसकी सत्ता सच्ची से सच्ची है, जो बदल नहीं सकती, जिसका कोई आना-जाना नहीं है। जब तुम वहाँ बैठे होते हो तब दुनिया भी तुम्हारी होती है और चूँकि हम वहाँ नहीं बैठे होते इसीलिए हम दुनिया में भी फिसड्डी रह जाते है।
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प्रश्नकर्ता: धिकतर समझ है जो है; या तो भविष्य का सोचते हैं; या फ्यूचर प्लानिंग करते है; या फिर जो अतीत हो चुका है; उसके परिणामों की; उससे हम डरते हैं। मतलब जो एक फियर फैक्टर होता है। सर, जबकि हमें पता है कि दोनों में एक इल्यूज़न लाइन कल्पना मात्र है। तो सर, जो हमारे हाथ में है, वह प्रेज़ेंट है, वर्तमान, सर उसका फायदा न उठाते हुए हम इन दोनों की तरफ़ क्यों डायवर्ट होते है इतना?
प्रश्नकर्ता: मन स्थिर नहीं हो रहा, तो मन स्थिर कैसे करे?
आचार्य प्रशांत: बेटा, जब आप कहते हो कि हमारे हाथ में सिर्फ़ वर्तमान है, तो वर्तमान से क्या समझते हो?
प्रश्नकर्ता: सर, आज, अभी। जिसमें कुछ कर सकते हैं।




