मजबूरी का रोना बंद करो, हिम्मत दिखाओ खतरा उठाओ || आचार्य प्रशांत (2023)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, पता लगता है कि आज मैंने कोई इच्छा की, वो पूरी भी हो गयी, पर उससे पूरापन अभी भी नहीं हुआ, जो चाहा था उससे वो नहीं मिला। तो फिर हम कोई दूसरी ऐसी चीज़ ढूँढते हैं जिससे शान्ति मिले। पर उसका कोई ऐसा दूसरा विकल्प नहीं मिलता, तो फिर हम दोबारा उसी स्थिति में, जो ख़राब वाली आदत थी, फिर से उसी में चले जाते हैं, वही सब चलता रहता है।
तो यहाँ पर हम क्या करें? जब हम जान गये हैं कि हालत अभी ख़राब है हमारी, तो फिर हमारा अगला क़दम क्या होना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: नहीं, मिलता नहीं है या महँगा मिलता है विकल्प?
जो कहानी सुनायी है न, ये बुद्धू बनाने वाली कहानी है। इन्होंने कहा कि दिख भी जाता है कि ग़लत फँसे हुए हैं, दम घुटता भी है, तो अपनी वर्तमान स्थिति का विकल्प तलाशते हैं तो विकल्प मिलता नहीं है, तो फिर पुरानी ही स्थिति से सन्तोष करना पड़ता है। यही है न कहानी?
प्र: हाँ।
आचार्य: अपनी कहानी से ख़ुद को ही बुद्धू बनाते हो, मुझे भी बना रहे हो। विकल्प सब हैं, महँगे हैं। विकल्प तो बिलकुल हैं, महँगे हैं।
जैसे कोई घटिया नौकरी करे, और वहाँ पर बॉस भी घटिया, और वो दुत्कार दे। तो एकदम तन्नाकर आये हैं अपने सिस्टम (कम्प्यूटर) पर, कि रेज़िग्नेशन


