‘मुझे किसी की फीलिंग्स नहीं हर्ट करनी है। मुझसे मम्मी-पापा के आँसू नहीं देखे जाते। मैं गिल्टी फील करने लगती हूँ।’ गिल्टी फील करना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है लेकिन सही वजह से गिल्टी फील करो न। असली गलती यह है कि आप अपना जीवन व्यर्थ कर रही हैं। न ज्ञान है, न कला है, न कौशल है, न अनुभव है, कुछ नहीं है, दुनिया देखी नहीं है। महिला वग़ैरह आप बहुत बाद में हैं, सबसे पहले आप इंसान हैं और इंसान होने का मतलब ही होता है कि चेतना होना।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा प्रश्न ये था कि आपसे ये समझने को मिलता है कि बॉडी आइडेंटिफिकेशन उसी से पैट्रिआर्की, ये किसी भी लड़की के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं। पर मुझको ये भी दिखता है कि ये जो गिल्ट होता है कि मैंने अपने लिए कुछ कर लिया, तो रिस्पॉन्सिबिलिटी छोड़ दी, अपने लिए कर रही हूँ सिर्फ़, सेल्फ़िशनेस का जो गिल्ट होता है, ये उससे भी बड़ा मुझे लगता है कि दुश्मन है। तो इस गिल्ट की जो फ़ीलिंग होती है, गिल्ट की, ये कहाँ से और इससे छूटा कैसे जाए? कि मैंने अपनी रिस्पॉन्सिबिलिटीज़ छोड़ दी अपनी, या दूसरों से मतलब ज़्यादा नहीं है।
आचार्य प्रशांत: किसकी तरफ़ रिस्पॉन्सिबिलिटी?
प्रश्नकर्ता: जैसे एक गृहणी है वो कह रही है कि मैं अब घर का काम ज़्यादा नहीं करूँगी। मैं अब अपने लिए इंडिपेंडेंटली काम करूँगी। तो वो कह रही है कि मैंने अब रिस्पॉन्सिबिलिटी छोड़ दी अपने घर की मैं अब अपने लिए कर रही हूँ, तो




