प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। आपका एक वीडियो था, वो अभी हाल ही में आया था और उसको कई सारे साथियों ने देखा। और मैं उस वीडियो के कमेंट्स को पढ़ रहा था तो मैंने वहाँ पर देखा कि कई सारी जिज्ञासाएँ थीं, लोगों के सवाल थे, जो मुझे वहाँ मिले और उन्होंने मुझे भी प्रेरित किया कि मैं थोड़ा और रिसर्च करूँ और उन्होंने जो प्रश्न पूछे थे मैं उनके बारे में पढूँ। तो आज मैंने कुछ ऐसे ही सवाल जो उस वीडियो के कमेंट्स में थे और कुछ डेटा जो मैंने खुद रिसर्च की उसको पढ़कर, वो आपके सामने रखना चाहूँगा। और जो बातें हैं मैं चाहूँगा कि उसके ऊपर आप थोड़ा बात करें और लोगों को हमें....।
आचार्य प्रशांत: बहुत बढ़िया। तो आप आज डेटा वगैरा लेकर आये हैं काफ़ी।
प्र: जी, जी। मैं देख रहा था, सबसे पहला जो एक तर्क मुझे सबसे अधिक बार दिखता है वो ये दिखता है लोग कहते हैं कि सर जो पेड़ हैं उनमें भी तो जान है। तो हम जब कहते हैं शाकाहार करते हैं तो उनको भी तो दर्द होता होगा। तो इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
आचार्य: देखो, दो तीन बातें हैं। पहली बात तो ये है कि पेड़-पौधों वगैरा के पास रिएक्ट(प्रतिक्रिया) करने की क्षमता तो होती है और यही बात पिछली शताब्दी में वैज्ञानिकों द्वारा सिद्ध भी करी गई थी। लेकिन पेन फील (दर्द का अनुभव) करने के लिए एक आपको स्नायु तंत्र चाहिए, सेंट्रल नर्वस सिस्टम चाहिए। वो पेड़-पौधों के पास नहीं होता। हम इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि सब जीव जिनमें पेड़-पौधे भी हैं, सब कौंशियस (चेतन) होते हैं। हाँ, एक पौधा भी निश्चित रूप से कौंशियस होता है, ये यहाँ पौधा रखा हुआ है और मैं इसको नुकसान नहीं पहुँचाना चाहूँगा। इसमें भी चेतना है।




