क्या आत्मा को ही इस्लाम में रूह और ईसाइयत में स्पिरिट कहते हैं? || आचार्य प्रशांत (2021)

प्रश्नकर्ता: क्या आत्मा को ही इस्लाम में रूह और क्रिश्चियनिटी (ईसाइयत) में स्पिरिट कहते हैं?
आचार्य प्रशांत: नहीं, आत्मा न रूह है, न सोल है, न स्पिरिट है; आत्मा आत्मा है। अंग्रेज़ी में आत्मा के लिए एक विशिष्ट शब्द होता है – ‘सेल्फ़’; ‘सोल’ नहीं, ‘सेल्फ़’। और आत्मा वेदांत में बिलकुल एक विशिष्ट, केंद्रीय और आख़िरी तत्व है, जो दूसरे दर्शनों में पाया नहीं जाता।
सेल्फ़ की अवधारणा ही नहीं है दूसरे पंथों में, समुदायों में, मज़हबों में। वहाँ गॉड (ईश्वर) हो सकता है, ट्रिनिटी हो सकती हैं, स्पिरिट हो सकती है। अल्लाह और अल्लाह ने जो फिर पूरी कायनात बनाई है, वो हो सकती है। फादर (पिता), सन (पुत्र) और होली स्पिरिट हो सकते हैं, लेकिन आत्मा वहाँ कहीं नहीं है। आत्मा बहुत अनूठी चीज़ है, अगर मैं उसे चीज़ कह सकूँ तो, आत्मा बहुत अनूठी चीज़ है, जो वैदिक दर्शन में ही पयी जाती है।
आत्मा क्या है? आत्मा है – तुम्हारी और मेरी सच्चाई। और सोल और स्पिरिट क्या हैं? ये कांसेप्ट्स हैं। मन की कुछ मान्यताओं को कहते हैं सोल या स्पिरिट और मन जहाँ ख़त्म हो जाता है, उसको कहते हैं आत्मा। तो सेल्फ़, सोल और स्पिरिट में ज़मीन आसमान का अंतर है। आत्मा को कभी सोल समझ भी मत लेना।
कुछ दर्शन हैं — जैसे छः दर्शन चलते हैं सनातन परंपरा में, पारंपरिक रूप से — जो कि जीवात्मा की बात करते हैं। और जो कहते हैं कि जितने लोग हैं, सबकी अलग–अलग जीवात्मा है। उसको तुम सोल बोल सकते हो। ठीक है? जैसे मीमांसा दर्शन है, उसमें ये माना जाता है कि हर प्राणी की अपनी अलग एक जीवात्मा है, वो ठीक है। उसको सोल बोल सकते हो। लेकिन वेदांत में जिस आत्मा की बात हो रही है, और ये जो छः दर्शन हैं, इनमें जो श्रेष्ठतम है और जिसको वैश्विक मान्यता भी सबसे ज़्यादा मिली है, वो वेदांत ही है।



