मैं होऊँगा वैसा, बात बताओ सही है या नहीं है? बोलो, बात सही है कि नहीं है? अगर सही है, तो बात ले लो। मैं तुमसे थोड़ी कह रहा हूँ, मुझे उठा के अपने घर बैठा लो। मुझे आना भी नहीं है तुम्हारे घर, बुलाओगे तो भी नहीं आऊँगा। मैंने एक बात कही है, बस उस बात का ही रिश्ता है हमारा और तुम्हारा। वो बात अगर तुम्हें ठीक लगती है, तो समझ लो। और इधर-उधर की फालतू तो मत बताओ, ये बाबा ऐसा है, कि बाबा वैसा है।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आप जो कुछ भी बोलते हैं, समझाते हैं, वो बात मुझे सचमुच बहुत ही ज़्यादा अच्छी लगती है। लेकिन, क्योंकि आप एक धार्मिक गुरु हैं, इसीलिए आपकी बातों पर पूरी तरीक़े से विश्वास कर पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल है। पिछले कुछ सालों में धर्म के क्षेत्र में और धार्मिक गुरुओं के साथ इतने घोटाले हुए हैं कि मेरा अब धर्म पर से और सभी गुरुओं, बाबाओं से भरोसा उठ गया है। अब मैं आपको सुनता हूँ, बात सही लगती है, लेकिन दिल में मेरे ये विश्वास है कि यहाँ भी कुछ गड़बड़ हो सकती है।
आचार्य प्रशांत: ऐसा है क्या? आप वाक़ई छाछ फूँक-फूँक के पी रहे हो। 2G स्कैम हुआ था, तो आप मोबाइल नहीं चलाते? बहुत बड़ा घोटाला हुआ था, हज़ारों करोड़ का घोटाला हुआ था। तो उसके बाद आपने मोबाइल चलाना बंद कर दिया?
आप कह रहे हो, पिछले 10 साल में कुछ धर्म गुरु पकड़े गए हैं। कोई बलात्कार में, कोई लूट में, कोई और घपला, कुछ-कुछ, तो अब धर्म पर से ही भरोसा हट गया। कुछ धर्म गुरुओं पर आरोप लगे, जेल हुई, तो साहब, हमारा तो अब धर्म से ही भरोसा उठ गया। हम धर्म को ही नहीं देखना चाहते, उपनिषदों को ही नहीं देखना चाहते। आचार्य जी, क्या पता आप भी ऐसे ही फ्रॉड हों। मैं तो पूछ रहा हूँ, बताओ न? अगर इतना ही आप छाछ फूँक-फूँक कर पीने वाले हैं, तो जब भी किसी भी क्षेत्र में कहीं कुछ भी गलत निकल जाता है, तो उस क्षेत्र से संबंधित जो कुछ है, वो सब त्याग दिया करिए।




