जब आप युवा होते हो, तो आपके लिए बहुत ज़रूरी होता है कि आपको दिखाई दे कि दुनिया एक इंसाफ़-पसंद जगह है। पर वो जो बच्चा है, उसके सामने अगर तुम ये हालत पैदा कर दोगे कि 'तेरी मेहनत अर्थ नहीं रखती, तरह-तरह की कुटिलताएँ अर्थ रखती हैं', तो क्या वो ज़िंदगी में कभी मेहनत और ज्ञान को सम्मान देगा? एक अच्छा राष्ट्र अपने लोगों को भरोसा देता है कि योग्यता का सम्मान होगा, श्रम को मूल्य मिलेगा। जो समाज ज्ञान को इज़्ज़त नहीं देता फिर उस समाज में अंधविश्वास पनपता है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा सवाल हाल ही में जो एस.एस.सी. एग्ज़ाम्स की अव्यवस्था को लेकर प्रोटेस्ट हो रहा है, उसके संबंध में है। ये अत्यंत दुखद है कि आज़ादी के इतने साल बाद भी इस तरह की मूलभूत समस्याओं को हम नहीं सुलझा पा रहे और छात्रों को पेपर लीक, भ्रष्टाचार आदि से गुज़रना पड़ रहा है। और एक तरफ़ तो हम सभ्य समाज और बिल्कुल सभ्य राष्ट्र होने का दावा करते हैं, फिर भी हम इस तरह की समस्याओं को सुलझा नहीं पाते। तो इसका मूलभूत कारण?
आचार्य प्रशांत: मूलभूत वग़ैरह तो सब बाद में आएगा। तुमने भी दिया था क्या पेपर इस बार?
(प्रश्नकर्ता ना में अपना सिर हिलाते हुए)।
तो तुम्हें इसमें इतनी रुचि कैसे है? तुम्हारे भाई-बहन, कोई दोस्त-यार, कोई है जिन्होंने दिया हो?




