बहुत जल्द ऐसा हो सकता है कि एक सुपर इंटेलिजेंट प्राणी आ जाए, जो हमसे श्रेष्ठ हो, अपने लक्ष्य, दर्शन और नैतिकता खुद तय करे। वह ऐसी सभ्यता खड़ी कर सकता है, जो इंसानी बुद्धि से परे होगी। इसे रोकने का उपाय आज ही करना होगा। जो लोग AI विकसित कर रहे हैं, वे इसी समाज से आते हैं और इसकी प्रवृत्तियों के अधीन हैं। उन्हें देखना होगा कि वे किस दृष्टि से AI को क्या काम सौंप रहे हैं, क्योंकि जो आप आज लिख रहे हैं, वह कल आपको लिख देगा।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, मेरा प्रश्न आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर है। यह बहुत आजकल चर्चा में है और ऐसा रिसर्चर्स का मानना है कि जैसे ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ह्यूमन लेवल इंटेलिजेंस को सरपास करेगी इसकी जो ग्रोथ है वो हमारे नियंत्रण से बाहर चली जाएगी। कुछ रिसर्चरर्स ये भी कह रहे हैं कि ये ऑलरेडी हमारे नियंत्रण से बाहर जा चुकी है। तो क्या यह जो एक्सपोनेंशियली ग्रोथ है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वो हमारे लिए हानिकारक है? या फिर दिस विल प्रूव टू बी अ न्यू वे अहेड फॉर अस ऐज अ स्पीशीज ऐज वेल ऐज फॉर द प्लैनेट।
आचार्य प्रशांत: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोई हमसे बाहर की, हमसे अलग चीज़ थोड़ी है। कोई वो कहीं किसी एलियन ग्रह से उतरी हुई चीज़ थोड़ी ही है। हमने ही उसको बनाया है ना। उसके फायदे हम सभी जानते हैं। एजुकेशन में उसका फायदा है। सर्विसेस में उसका फायदा है। मेडिकल साइंस में फायदा है। साइंस में, रिसर्च में जो यह तथाकथित क्रिएटिव फील्ड्स होते हैं। इनमें भी उसका फायदा है।
अगर सबको स्टूडेंट माना जाए तो नॉलेज क्षेत्र में तो ये वरदान जैसा है।




