अमृत केंद्र में है इस कहानी के।और अमृत कहां से मिलना है? आत्म मंथन से। जो जितना स्वयं को जानता जाएगा उतना वो स्वयं से माने मृत्यु से मुक्त होता जाएगा। हम जो बने बैठे हैं वही मृत्यु है। जो आप अपने आप को समझते हो ना उसी का नाम मौत है। और जितना आप खुद को देखते जाते हो उतना समझ में आता जाता है कि मैं अपने आप को जो मानता हूं वो सब व्यर्थ है। मैं वो हूं ही नहीं। “नकार नेति”। अमृत माने कुछ पाना नहीं। अमृत माने मृत्यु से मुक्त होना। यही अमृतत्व है। मृत्यु से मुक्त होना।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: तो इस बार महाकुंभ लगने वाला है। बहुत तैयारियां चल रही हैं। तो हमने भी ठान लिया है कि इस बार लोगों को पकड़ पकड़ के सही धर्म बताएंगे। महाकुंभ का सही अर्थ बताएंगे। तो यह मेरा पूरे प्रयागराज टीम की तरफ से सवाल है कि सर एक बार आप और बेहतर तरीके से उसका वेदांतिक अर्थ बताएं ताकि लोगों को वहां और सही तरह से हम सब पूरा बता सके, समझा सके।
आचार्य प्रशांत:दो तीन जगह आता है पुराणों में कुंभ का। तो कहानियां भी दो-तीन अलग-अलग है। पर सब कहानियों में एक साझी बात है कि चार जगह बूंदे गिरी थी। जो सबसे प्रचलित कहानी है वो ले लेते हैं।
तो सबसे प्रचलित कहानी यह है कि देवता हैं, दानव हैं। लेकिन दोनों में जितने भी भेद हो, द्वेष हो उसके बाद भी एक साझी कामना है कि किसी तरह मरने से बच जाएं। किसी तरह मरने से बच जाएं।
ये देवता और दानव कौन है? ये दोनों अहंकार के रूप हैं। देवता भी अहंकार है। दानव भी अहंकार है। अहंकार मरने से बचना चाहता है। मुर्दे की जान खतरे में। तो अंतर बस यह है कि आप देवताओं को कह सकते हो कि वो आत्ममुखी अहंकार है। जो सत्य से दूरी तो बना के रखता है लेकिन मुख उसका सत्य की ओर ही रहता है। तो कम से कम जब पीटा जाता है तो भाग के जाता है फिर। कहते हैं ना कि फिर सारे देवता भाग करके महादेव की शरण में गए। तो कम से कम जब पिटता है तो उसको थोड़ी बुद्धि आ जाती है। मुख उसका सत्य की ओर है। लेकिन वो स्वयं सत्य नहीं है। सत्य से दूरी बना के रखता है। तो देवताओं में जितने तरीके के दुर्गुण हो सकते हैं वो भी आप पाते हो। छल कपट देवता भी करते हैं। लोभ देवताओं में भी होता है, डर देवताओं में भी होता है। चोरी चकारी भी कर ले आते हैं देवता। वासना संबंधित भी उनकी बड़ी कहानियां हैं। तो ये सब देवताओं में भी होती है।




