खुफ़िया अनुभव, जो सिर्फ़ खास लोगों को होते हैं || आचार्य प्रशांत (2021)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो अनुभव आपको नहीं हैं, वो किसी और को कैसे हो सकते हैं, ये कहीं ऐसा तो नहीं, आपका कोई पूर्वाग्रह है?
आचार्य प्रशांत: नहीं, क्या है? खोलकर बताओ बात, क्या कह रहे हैं? किसका अनुभव? एनलाइटनमेंट का?
प्र: आचार्य जी, अगर एनलाइटनमेंट नहीं होता है, कोई ऐसी घटना नहीं घटती है, तो जितने भी सन्त-महात्मा महापुरुष इत्यादि रहे हैं, सबने कुछ-न-कुछ कहानी क्यों गढ़ी? तो लॉजिकली (तार्किक रूप से) क्या इस पॉसिबिलिटी (सम्भावना) को शत-प्रतिशत नकारा जा सकता है कि आपके निजी जीवन में या अनुभव क्षेत्र में एनलाइटनमेंट जैसा कुछ नहीं है। इसीलिए वो फंडामेंटली (मूल से ही) इस बात को नकार रहे हैं?
आचार्य प्रशांत: बात ये नहीं है कि किसी को अनुभव हुआ, किसी को अनुभव नहीं हुआ। बात ये है कि क्या हम समझते भी हैं कि अनुभोक्ता एक्सपीरियंसर कौन है? एक बार आप ये समझ लोगे कि एक्सपीरियंसर कौन है, फिर आपके दिमाग से ये बात उतर जाएगी कि एक्सपीरियंस किसी पार की वस्तु का हो सकता है।
ये जो अनुभोक्ता है न जो अनुभव करता है, ये कौन है आपके भीतर? कौन है जो अनुभव कर रहा है?
श्रोता: मैं।



