खा गया हमें हमारा खाना || आचार्य प्रशांत, बातचीत #veganism (2021)

प्रश्नकर्ता: थैंक यू सो मच आचार्य प्रशांत फॉर जॉइनिंग (जुड़ने के लिए आपका बहुत धन्यवाद आचार्य प्रशांत) सर, आपके व्यूज़ वीगनिज्म (शुद्ध शाकाहार) के बारे में काफ़ी लोगों को पता हैं, आपने बहुत सारे प्लेटफार्म्स पर, बहुत सारे वीडियोज में ऐसा बोला है कि वेगिज को आपने सपोर्ट करा है।
लेकिन मैं वो क्वेश्चन फिर से रिपीट नहीं करुँगी, मैं आपसे यह जानना चाहती हूँ कि आप साइंस और स्प्रिचुअलिटी दोनों की बात करते हैं, तो विगनिज्म (शुद्ध शाकाहार) जो है, वो साइंस (विज्ञान) से और स्प्रिचुअलिटी (आध्यात्मिकता) से यानि कि विज्ञान और अध्यात्म से, दोनों से कैसे कनेक्टेड (जुड़ा हुआ) है?
आचार्य प्रशांत: देखिए, अध्यात्म से शुरू करते हैं, तो अहिंसा एकदम मूल में बैठा हुआ है, आध्यात्मिक है। जो सनातन धारा के मूल और सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं वेद, अहिंसा की बात उन्हीं में से शुरू हो जाती है। उपनिषदों में कही गयी है। वेदों में, उपनिषदों में अहिंसा की बात है।
और उपनिषदों के बाद ये तो हमें पता ही है कि गौतम बुद्ध ने, महावीर ने, दोनों ने अहिंसा को कितनी ऊँची जगह दी और अध्यात्म हो नहीं सकता अहिंसा के बिना। उसमें अगर आप थोड़ी गहराई में जाएँगे तो पता चलेगा कि ये जो मूल विभाजन होता है अहंकार का, संसार का, वही हिंसा है।
तो कोई इंसान अपनेआप को आध्यात्मिक कहे और साथ ही हिंसा में लिप्त रहता हो, ये हो नहीं सकता और यही वजह है कि भारत में बाक़ी विश्व की तुलना में जानवरों के प्रति और पेड़ो के लिए और नदियों और पहाड़ों के लिए ज़्यादा सम्मान रहा है, ज़्यादा अपनापन रहा है, क्योंकि भारत में अध्यात्म ज़्यादा रहा है।



