कर्मयोग और कर्मसन्यास में अंतर? || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2014)

आचार्य प्रशांत: कर्मसंन्यास और कर्मयोग क्या हैं? दोनों में अन्तर क्या है? आमतौर पर हम जिसे कर्म कहते हैं; वो कैसे होता है? वो ऐसे होता है कि जैविक रूप से और सामाजिक रूप से मन संस्कारित रहता है। फ़िज़िकल, सोशल दोनों तरह के संस्कार। तो मन में पहले ही ये व्यवस्था बैठी होती है कि इस तरह की स्थिति में इस तरह का उत्तर देना है, ऐसा कर्म कर देना है; ये हमारा साधारण कर्म है। क्या है साधारण कर्म? बाहर एक स्थिति है और मन के पास पहले ही ये ढाँचा तैयार है कि इस स्थिति का ऐसे उत्तर देना है। और चूँकि मन के पास कुछ तयशुदा ही उत्तर हैं इसीलिए वो बाहर की सारी ही स्थितियों को उनके तयशुदा प्रश्नों में ही बाँधकर देखेगा।
मन इतना बड़ा नहीं है कि उसमें प्रतिक्षण बदलती प्रत्येक स्थिति का उत्तर हो। उसके पास तो एक मॉडल है, ऐसी स्थिति, ये उत्तर, ऐसी स्थिति, ये उत्तर। और ऐसे दस-बीस या दस हज़ार या बीस हज़ार जवाब उसके पास हैं लेकिन जीवन में जो स्थितियाँ हैं, वो असंख्य हैं। तो मन क्या करता है कि बाहर की स्थिति कैसी है, इससे उसे कोई विशेष प्रयोजन नहीं रहता। वो तो बस ये समानता भिड़ाता है, मैचिंग करता है कि बाहर की स्थिति के आस-पास का कौनसा संस्कार, कौनसा सवाल मेरे पास पहले ही मौजूद है और उत्तर दे देता है।
दो घटनाएँ अब यहाँ पर घट रही हैं। पहला, उत्तर समझ से नहीं आ रहा है, उत्तर आत्मा से नहीं आ रहा है। दूसरा, उत्तर बाहर की स्थिति से भी नहीं आ रहा क्योंकि आपको बाहर की स्थिति भी ठीक-ठीक पता नहीं है। आप बाहर की स्थिति ठीक-ठीक पता कर ही नहीं सकते क्योंकि अगर ठीक-ठीक पता चल गयी तो आपके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। आपके पास उसका उत्तर ही नहीं होगा। भाई, आपको बता दिया गया है कि बाहर यदि लाल है तो आपको कहना है 'ल'। बाहर यदि सफ़ेद है तो आपको कहना है, 'स'। बाहर यदि नीला है तो आपको कहना है, 'न' और बाहर यदि हरा है तो आपको कहना है, 'ह'। और दुनिया भर के रंगों में जितनी विविधता हो सकती है उसको इन्हीं चार रंगों में कैद करके आपको पढ़ा दिया गया है क्योंकि पढ़ाने की सीमा होती है। जो पूरा स्पेक्ट्रम (वर्णक्रम) है उसमें तो अनगिनत रंग हैं। हर रंग का नाम नहीं रखा जा सकता क्योंकि असंख्य नाम हो जाएँगे और जब हर रंग का नाम ही नहीं रखा जा सकता तो हर रंग के आने पर आपको क्या जवाब देना है, ये भी निर्धारित नहीं किया जा सकता।






