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कैसा है तुम्हारा मन - फूल, या धूल? || आचार्य प्रशांत, दादू दयाल पर (2017)
Author Acharya Prashant
Acharya Prashant
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19 reads

प्रसंग:

  • मन क्या है?
  • कैसा है तुम्हारा मन - फूल, या धूल?
  • मन को माणिक क्यों बोला गया है?
  • मन माणिक कब है?
  • मन को कीमती क्यों बताये है संत दादू दयाल?
  • मन माणिक मूरख राखि रे, जन-जन हाथ न देहु। इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

दोहा:

मन माणिक मूरख राखि रे, जन-जन हाथ न देहु। दादू पारिख जौहरी, राम साध होई लेहु ।।

~ संत दादू दयाल

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